एआरबी टाइम्स ब्यूरो | धर्मशाला
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में शनिवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। डिग्री कॉलेज धर्मशाला के सभागार में हुए इस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके हाथों सम्मान प्राप्त कर विद्यार्थी काफी उत्साहित और भावुक नजर आए।
दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 509 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 33 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी दी गई। साथ ही 28 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति ने स्वयं 12 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 8 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं।
इन विद्यार्थियों को मिला गोल्ड मेडल
गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में स्नातक वर्ग से सोनाली, नीलम, मीनाक्षी चौधरी, नैंसी, श्रुति और स्नातकोत्तर वर्ग में मनीषा कुमारी, शिवालिका, किरण ठाकुर, आंचल ठाकुर, राकेश भारद्वाज, अंकुश राणा, सचिदानंद शर्मा, श्रेय शर्मा, रूपानी, कोमल कुमारी, शायनी ठाकुर, प्रदीप सिंह, संगम भारती, शुभांकर, अंजलि शर्मा, दीक्षा, योगेंद्र देवी, दीपशिखा, निधि मनकोटिया, ताज बीबी, सोनाली और अर्जुन सिंह को स्वर्ण पदक से नवाजा गया।

उपराष्ट्रपति बोले– युवाओं को नशे से दूर रहकर नवाचार पर देना होगा जोर
CU Convocation में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं से नशे से दूर रहने, नवाचार को अपनाने और राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि बताते हुए कहा कि राज्य ने देश के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध आतिथ्य परंपरा, जीवंत संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत की भी सराहना की।
उन्होंने भारत की प्राचीन शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे महान शिक्षा केंद्र अपने विद्वान शिक्षकों, बौद्धिक विमर्श और शोध परंपरा के कारण विश्व में प्रसिद्ध हुए। उन संस्थानों के आचार्य आजीवन शिक्षार्थी थे और वाद-विवाद तथा शोध के माध्यम से ज्ञान को निरंतर विकसित करते थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को भी संकाय विकास, नवाचार, अंतःविषयक शोध और वैश्विक सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि ज्ञान और विचारों के विकास को बढ़ावा मिल सके।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलें युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की “कम्युनिटी लैब” पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे छात्र और शिक्षक स्थानीय समुदायों से जुड़ते हैं और ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझते हैं। उन्होंने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति और पर्यावरणीय संतुलन आवश्यक होगा। विकसित भारत की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित होनी चाहिए।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी और कुलपति सत प्रकाश बंसल भी मौजूद रहे।
