एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने वाली सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि तीन साल का कार्यकाल बीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार अपने पहले बजट की कई घोषणाओं को भी जमीन पर नहीं उतार पाई है। कई योजनाएं आज भी सिर्फ कागजों में ही सीमित हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि जिस तरह झूठे वादों और गारंटियों के सहारे सरकार सत्ता में आई, उसी तरह बजट में भी केवल घोषणाएं कर सरकार चलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि चौथा बजट पेश करने से पहले पिछले तीन बजटों की अधूरी घोषणाओं का जवाब दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गारंटी के नाम पर प्रदेश की मातृशक्ति और बजट घोषणाओं के नाम पर छात्र शक्ति को भ्रमित किया। पहले बजट में 20 हजार मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए 25 हजार रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब इस योजना का कहीं जिक्र तक नहीं होता।
इसके अलावा प्रदेश में छह ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई, जबकि दूसरी ओर इलेक्ट्रिक चार्जिंग पर 6 रुपये प्रति यूनिट का एनवायरमेंट सैस लगा दिया गया। हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोलने की घोषणा भी अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। चंबा, नाहन और हमीरपुर में पीईटी स्कैन मशीन लगाने की घोषणा भी फाइलों में ही दबी हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों, बागवानों, खिलाड़ियों, महिलाओं और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों के लिए की गई कई छोटी-छोटी घोषणाएं भी अमल में नहीं आ पाई हैं। युवाओं के लिए रोजगार और स्वावलंबन की योजनाएं भी सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
जयराम ठाकुर के मुताबिक सुक्खू सरकार ने पहले वर्ष में 63,712 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में 75,496 करोड़ रुपये और तीसरे वर्ष में 58,343 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस तरह तीन वर्षों में करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट विधानसभा में रखा गया। इसके अलावा सरकार ने 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी लिया है।
उन्होंने कहा कि इतना बड़ा बजट और भारी कर्ज लेने के बावजूद यदि बजट में घोषित योजनाएं तीन साल में शुरू भी नहीं हो पाईं, तो इससे सरकार की नीति और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि जिन योजनाओं के लिए बजट में प्रावधान किया गया था, वे शुरू क्यों नहीं हुईं और उनके लिए रखा गया पैसा आखिर गया कहां।
