एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Shimla Drug Case : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सामने आए करीब 1 करोड़ रुपये के Lysergic Acid Diethylamide (LSD) नशे की तस्करी के मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। इस बहुचर्चित मामले में निलंबित किए गए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के चारों पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार पुलिस कर्मियों में राजेश कुमार, समीर, नितेश और अशोक कुमार के रूप में हुई है। चारों कुल्लू जिले के रहने वाले हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन एसटीएफ कर्मचारियों ने एलएसडी नशे के तस्करों को पकड़ने के बाद कानूनी कार्रवाई करने के बजाय छोड़ दिया था। एएसपी (हेडक्वार्टर) अभिषेक ने वीरवार को प्रेसवार्ता में बताया कि प्रारंभिक जांच में चारों की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत मिले हैं, इसके आधार पर उन्हें अरेस्ट किया गया है।
10 मार्च को शिमला में गिरफ्तारी से खुला पूरा मामला
Shimla Drug Case का खुलासा 10 मार्च को हुआ, जब शिमला पुलिस के स्पेशल सेल ने बीसीएस क्षेत्र में छापेमारी कर 562 स्ट्रिप LSD नशा बरामद किया। पुलिस ने तकरीबन एक करोड़ रुपये के एलएसडी नशे के साथ पंजाब के संदीप शर्मा और सिरमौर की प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने नशे के मुख्य सप्लायर को नविएल हैरिसन को दबोचा। आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि शिमला में बरामद नशे की खेप पहले कुल्लू पहुंचाई गई थी, जहां STF के कुछ कर्मियों ने आरोपियों को पकड़ने के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया और उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो चारों एसटीएफ कर्मचारियों तक पहुंची।
Shimla Drug Case की जांच में खुलासा हुआ कि 7 मार्च को STF कुल्लू को सूचना मिली थी कि केरल निवासी मुख्य सप्लायर नविएल हैरिसन 8 मार्च को भुंतर में LSD और MDMA के साथ पहुंचेगा। सूचना के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची और कथित तौर पर 1450 स्ट्रिप LSD और 30 ग्राम MDMA बरामद किया। लेकिन इस कार्रवाई का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। न की केस दर्ज किया गया। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने बरामद नशे का कुछ हिस्सा अपने पास रख लिया और बाकी स्ट्रिप आरोपी संदीप को वापस दे दी, जिसे बाद में शिमला में बेचने के लिए लाया गया और पुलिस ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।
तकनीकी जांच में बड़े सबूत
जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), IPDR और CCTV फुटेज से यह पुष्टि हुई कि 8 मार्च को सभी आरोपी और संबंधित पुलिस कर्मी कुल्लू में एक ही स्थान पर मौजूद थे। साथ ही STF के रिकॉर्ड में उस दिन किसी ऑपरेशन की एंट्री नहीं मिली, जिससे संदेह और गहरा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए 16 मार्च को चारों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर शिमला में लाइन हाजिर किया गया था।
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