एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
उपमंडल रामपुर के नरैण में पशुपालन विभाग, उपमंडल रामपुर द्वारा एक दिवसीय खुरपका-मुंहपका (FMD) जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक पशुपालक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य पशुओं में FMD एवं अन्य प्रमुख रोगों के लक्षण, बचाव और नियंत्रण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. शिवम वालिया, ब्लॉक टेक्नोलॉजी टीम से, ने प्राकृतिक खेती, जैविक उर्वरक और विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर अधिक टिकाऊ और लाभकारी कृषि-पशुपालन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके बाद डॉ. वरुण नेगी ने 1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट सेवा की जानकारी दी और बताया कि यह सेवा दूरदराज के क्षेत्रों में रोग प्रकोप से निपटने में किस प्रकार कारगर साबित होती है।
पशु चिकित्सा पॉलीक्लिनिक रामपुर के डॉ. अक्षय कुमार ने FMD एवं PPR रोगों के लक्षणों, बचाव और नियंत्रण के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पॉलीक्लिनिक में उपलब्ध शल्य चिकित्सा सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी, जिससे पशुपालकों को पशुओं के बेहतर उपचार के विकल्प समझ में आए।
ह्यूमेन पीपल संस्था के स्वयंसेवक प्रियंशु ने उपस्थित पशुपालकों को रेबीज रोग और उसके नियंत्रण के विषय में जागरूक किया। वहीं, डॉ. नेहा शर्मा (AMO, नरैन) ने आयुर्वेदिक जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राकृतिक जीवनशैली न केवल मनुष्य के लिए, बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अनिल कुमार शर्मा, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, SDVH जियोरी, ने संतुलित पशु आहार, स्थानीय संसाधनों से घर पर पशु आहार तैयार करने के तरीके, विभागीय योजनाओं और पशुओं में बांझपन की समस्याओं के निदान पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पशुपालकों से विशेष अपील की कि अपने पशुओं को अनुपयोगी होने पर आवारा न छोड़ें, बल्कि बेहतर उपचार हेतु आगे आएं और पशुओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
कार्यक्रम के अंत में सभी पशुपालकों को दवाइयों और फीड एडिटिव्स का वितरण किया गया। मंच संचालन बिहारी लाल चौहान (AHA, VH दत्तनगर) ने किया। इस अवसर पर BFSC सदस्य राजीव देश्टा, पशु सखियां नीलिमा, कपिला और किर्ता समेत अन्य विभागीय अधिकारी और पशु परिचारक भी उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम ने ग्रामीण पशुपालकों में पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण और जिम्मेदार पशुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
