एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
हिमाचल प्रदेश के बजट 2026-27 में ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ के अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने के फैसले को लेकर कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ, शिमला ने इस निर्णय को कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है।
संघ के जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह लक्टू समेत जेपी पराशर, प्रताप वर्मा, कैलाश चौहान, नीलम हिमटा, किशोर शर्मा, प्रेम सुख, दिनेश भलूनी, सुरेंद्र कंवर, आकाश दीप शर्मा, गगन चौहान, डॉ. विनोद मेहता, राजेश घालटा, दिनेश खुराना, ललित हंसरेटा, डॉ. रामसरन शर्मा, प्रेम चौहान, विकेश जनारथा, दिव्य दत्त शर्मा, हरीश कांटा, अजीत सिंह, संजीव नेगी, सुरेश चौहान, भूपेंद्र कंवर, बृजलाल ठाकुर और संतोष शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी किया।
संघ का कहना है कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा निर्णय लिया गया है, जिसमें कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का एक हिस्सा रोका जा रहा है। उन्होंने इसे “सरासर अन्यायपूर्ण” करार देते हुए कहा कि मध्यम वर्गीय कर्मचारी पहले ही आर्थिक दबाव में हैं और वेतन स्थगन से उनकी स्थिति और कठिन हो जाएगी।
संघ ने यह भी बताया कि अधिकतर कर्मचारी अपने वेतन पर ही गृह ऋण, वाहन ऋण, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य खर्च जैसे जरूरी दायित्व निभाते हैं। ऐसे में 3 प्रतिशत वेतन रोके जाने से उनके मासिक बजट पर सीधा असर पड़ेगा। महंगाई के इस दौर में लिया गया यह फैसला कर्मचारियों के मनोबल को कमजोर करेगा। साथ ही छठे वेतन आयोग के बकाया और अन्य भत्तों का भुगतान अभी तक लंबित होने से कर्मचारियों में पहले से ही असंतोष व्याप्त है।
संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और कर्मचारियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
