एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अकादमिक भ्रष्टाचार और फीस बढ़ोतरी को लेकर विरोध तेज हो गया है। स्टूडेंट्स फेडेरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट, जो 30 मार्च 2026 को विधानसभा में पेश की गई, में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मार्च 2023 तक की अवधि को कवर करने वाली इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से 2023 के बीच विश्वविद्यालय में 27 से 37 प्रतिशत तक संकाय पद खाली रहे। इसके अलावा 186 नियुक्तियों में अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें दस्तावेजों का सत्यापन तक नहीं किया गया। यहां तक कि एक अयोग्य सहायक प्राध्यापक और एक अतिथि संकाय की नियुक्ति कर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों का उल्लंघन किया गया।
SFI का कहना है कि इन खामियों के कारण शिक्षण गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ा है और छात्रों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा। संगठन ने आरोप लगाया कि पहले भी इन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय में शोध कार्य बेहद कमजोर स्थिति में है। तीन वर्षों में प्रति शिक्षक औसतन केवल 0.1 शोध परियोजना शुरू हुई। 214 संकाय सदस्यों द्वारा केवल 21 अनुसंधान प्रोजेक्ट शुरू किए गए, जो NAAC मानकों से काफी कम हैं। पेटेंट की संख्या भी नगण्य पाई गई।
उद्योगों के साथ किए गए 24 एमओयू में से केवल 5 ही सक्रिय हैं, जिससे छात्रों के प्लेसमेंट और व्यावहारिक अनुभव के अवसर सीमित हो गए हैं। वहीं, 16 में से 11 विश्वविद्यालय अनुदान पीठें अधिसूचना के 25 साल बाद भी सक्रिय नहीं हो सकीं। SFI ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को “धांधलियों का अखाड़ा” बना दिया गया है, जिससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हुई है बल्कि वित्तीय संकट भी गहरा गया है। इसी संकट से निपटने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया गया है, जिसका संगठन कड़ा विरोध कर रहा है।
SFI के राज्य सचिव सन्नी सेकता और राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने चेतावनी दी है कि यदि फीस बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे प्रदेश में व्यापक छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
