एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के बाद पार्षदों को तय समय के भीतर शपथ नहीं दिलाने के मामले पर बुधवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी नगर निकायों में निर्वाचित पार्षदों को 7 जून 2026 से पहले हर हाल में शपथ दिला दी जाएगी। सरकार ने 23 मई को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना भी अदालत में पेश की। सरकार की ओर से बताया गया कि नियमों के अनुसार नवनिर्वाचित सदस्यों को सात दिन का नोटिस देकर 30 दिन के भीतर शपथ दिलाना अनिवार्य है।
पंचायत चुनाव के चलते हुई देरी
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जिला उपायुक्त और एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारी इन दिनों पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों में व्यस्त हैं। पंचायत चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 28 मई और तीसरे चरण का मतदान 30 मई को होना है। वहीं पंचायत समिति और जिला परिषद के परिणाम 31 मई तक घोषित किए जाएंगे। इसी कारण नगर निकायों की शपथ प्रक्रिया में देरी हुई।
याचिकाकर्ता ने उठाया यह सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने और आगे का कार्यक्रम तय करने का अधिकार राज्य सरकार के बजाय राज्य निर्वाचन आयोग के पास है। आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, इसलिए उसका पक्ष आना जरूरी है। इस पर महाधिवक्ता ने दलील दी कि 23 मई को अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका समाप्त हो चुकी है। नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश नगर पालिका चुनाव नियम, 2015 के तहत शपथ ग्रहण और अन्य प्रक्रियाएं करवाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
29 मई को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं थे। कोर्ट को बताया गया कि वे अपने पैतृक क्षेत्र में पंचायत चुनाव में मतदान करने गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में आयोग की ओर से जिम्मेदार अधिकारी अदालत में उपस्थित रहे। मामले की अगली सुनवाई अब 29 मई को होगी। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को इस मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
