एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल हाईकोर्ट ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पदेन सदस्य यानी स्थानीय विधायक इन चुनावों में मतदान नहीं कर सकेंगे। यह आदेश शहरी निकायों की स्वायत्तता और निर्वाचित पार्षदों के अधिकारों से जुड़े मामले में आया है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि नगर निकायों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव केवल निर्वाचित सदस्यों के बहुमत और इच्छा के आधार पर कराए जाएं। अदालत ने शहरी विकास विभाग की 13 जुलाई 2023 की अधिसूचना/स्पष्टीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस स्पष्टीकरण में कानून विभाग की राय के आधार पर विधायकों को अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान का अधिकार देने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि नियमों की व्याख्या करने का अधिकार राज्य चुनाव आयोग के पास है, राज्य सरकार के पास नहीं।
विधायकों के अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों के अन्य अधिकार समाप्त नहीं किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 28, 30, 31 और 32 के तहत आयोजित सामान्य बैठकों और समितियों की बैठकों में विधायक भाग ले सकते हैं और अपनी भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान का अधिकार केवल निर्वाचित पार्षदों तक सीमित रहेगा। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि नगर निकाय स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं हैं। यदि विधायकों को इनके शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान की अनुमति दी जाती है तो यह स्थानीय निकायों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप होगा और जनता द्वारा स्थानीय स्तर पर दिए गए जनादेश की भावना प्रभावित हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
यह मामला वंदना कुमारी, संजय चौहान, नंदिनी सूद सहित कई निर्वाचित पार्षदों की याचिका पर अदालत पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सिर्फ चुने हुए पार्षदों का अधिकार है और विधायक या नामित सदस्य इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि कई नगर निकायों में पार्षदों की संख्या बराबर या बेहद कम अंतर वाली होती है। ऐसे में विधायक का एक वोट चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
राज्य सरकार का पक्ष, अगली सुनवाई कब?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि विधायक संबंधित शहरी निकायों का हिस्सा होते हैं, इसलिए उन्हें मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और अधिसूचना पर रोक लगा दी। हिमाचल हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 जून को तय की है। इस अंतरिम आदेश को प्रदेश की राजनीति और शहरी निकायों के चुनावी समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस विवाद पर आगे की दिशा और अंतिम निर्णय तय हो सकता है।
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