एआरबी टाइम्स ब्यूरो | मंडी
भविष्य में कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों की पहचान अब पहले से कहीं अधिक तेज और सटीक तरीके से हो सकेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT मंडी के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बायोफास्टनेट (BioFastNet – जैव-चिकित्सीय स्पेक्ट्रल विश्लेषण के लिए खंडित अटेंशन आधारित ट्रांसफॉर्मर नेटवर्क) नाम का एक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस AI आधारित मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में होने वाली FTIR जांच के जटिल आंकड़ों का स्वतः विश्लेषण कर डॉक्टरों को बीमारी के शुरुआती संकेत समझने और सही समय पर इलाज का निर्णय लेने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों पर घटेगी निर्भरता, बचेगा समय
वर्तमान में अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में फूरियर ट्रांसफॉर्म इंफ्रारेड (FTIR) तकनीक का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसके आंकड़ों के विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों, विशेष सॉफ्टवेयर और कई लंबी तकनीकी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। IIT मंडी की ओर से विकसित यह AI मॉडल बिना किसी जटिल प्री-प्रोसेसिंग के सीधे जांच के ‘रॉ डेटा’ (कच्चे आंकड़ों) का विश्लेषण कर सकता है। इससे न सिर्फ जांच रिपोर्ट जल्दी तैयार होगी, बल्कि विशेषज्ञों पर निर्भरता भी कम होगी।
दावा, 97.81% सटीकता के साथ किया प्रदर्शन
यह महत्वपूर्ण शोध IIT मंडी के ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम एंड मेंटल हेल्थ एप्लीकेशंस सेंटर’ और ‘सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स’ में किया गया है। इ परीक्षण के दौरान बायोफास्टनेट ने फंक्शनल ग्रुप प्रेडिक्शन डाटासेट पर 97.81 प्रतिशत की शानदार सटीकता (Accuracy) हासिल की, जो मौजूदा अन्य AI मॉडलों से काफी बेहतर है। IIT मंडी के सहायक आचार्य डॉ. प्रफुल हंबर्डे के अनुसार, भविष्य में इस तकनीक का उपयोग कैंसर ऊतक विश्लेषण, हिस्टोपैथोलॉजी, संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों की पहचान, ब्लड टेस्ट और दवाओं की गुणवत्ता जांच में किया जा सकेगा। तकनीक शोध के अंतिम चरण में है। मरीजों पर इसका क्लीनिकल परीक्षण होना अभी बाकी है। नियामक मंजूरी और व्यावसायिक एकीकरण के बाद ही इसका अस्पतालों में नियमित उपयोग शुरू हो सकेगा।
