एआरबी टाइम्स ब्यूरो | मंडी
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर बड़ा नेटवर्क चलाते हुए एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपना शिकार बनाया है। शातिरों ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), क्राइम ब्रांच के फर्जी अधिकारी बनकर पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ दिखाया और उनसे 1.14 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने करीब दो महीने तक रिटायर्ड अधिकारी को मानसिक दबाव और कानूनी कार्रवाई के डर में रखा। शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस थाना मंडी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66डी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
ऐसे बुना ठगी का जाल : गंभीर अपराध में फंसाने की दी धमकी
शिकायतकर्ता के अनुसार, साइबर ठगों ने वीडियो और फोन कॉल के जरिए उनसे संपर्क किया। ठगों ने खुद को शीर्ष जांच एजेंसियों का बड़ा अधिकारी बताते हुए दावा किया कि एक गंभीर आर्थिक अपराध की जांच में उनका नाम सामने आया है। आरोपियों ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनकी धनराशि को सत्यापन और सुरक्षा के लिए एक ‘सरकारी निगरानी खाते’ में जमा करना होगा। ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होते ही यह पूरी रकम उन्हें वापस कर दी जाएगी।
3 नवंबर से 2 जनवरी तक हुईं कई ट्रांजेक्शन
भय और भ्रम के माहौल में आकर सेवानिवृत्त अधिकारी ने आरोपियों के बताए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। उन्होंने 3 नवंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 के बीच करीब 5 लाख रुपये से लेकर 28 लाख रुपये तक की कई ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कीं। इस तरह किस्तों में कुल 1.14 करोड़ रुपये ठगों के खातों में चले गए। जब लंबी अवधि बीतने के बाद भी न तो रकम वापस मिली और न ही उन कथित अधिकारियों से दोबारा संपर्क हो पाया, तब पीड़ित को ठगे जाने का अहसास हुआ।
डरें नहीं, तुरंत 1930 पर कॉल करें
“डिजिटल अरेस्ट या किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी के नाम पर आने वाले ऐसे फर्जी कॉल से बिल्कुल न घबराएं। कोई भी कानून सम्मत एजेंसी फोन पर इस तरह की कार्रवाई या पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करती। किसी भी अनजान खाते में पैसा न भेजें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या अपने नजदीकी साइबर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।” — हिमाचल प्रदेश पुलिस
