एआरबी टाइम्स ब्यूरो, नाहन। शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची, दिखावे और कर्ज के बोझ को कम करने के लिए हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की ग्राम पंचायत सखौली ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। तिलोरधार विकासखंड की इस पंचायत ने विवाह समारोहों को सादगीपूर्ण बनाने के उद्देश्य से कई कड़े नियम लागू किए हैं। पंचायत ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ₹51,000 का भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें पूरी पंचायत को सामूहिक भोज (धाम) भी देना होगा। यह ऐतिहासिक फैसला पंचायत प्रधान कमलेश कुमार और उपप्रधान सुरेंद्र की मौजूदगी में आयोजित विशेष ग्राम सभा में सर्वसम्मति से लिया गया। पंचायत का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कर्ज के दलदल से बचाना और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना है।
🚫 शादी के लिए बनाए गए नए नियम और पाबंदियां
गहनों पर सीमित छूट: अब शादी समारोह में दुल्हन भारी-भरकम सोने-चांदी के आभूषण नहीं पहनेगी। विवाह के दौरान केवल मंगलसूत्र, नाक की तीली और कानों के झुमके (पारंपरिक बालियां) पहनने की ही अनुमति होगी।
गाड़ियों की संख्या तय: बारात में शामिल होने वाली गाड़ियों की संख्या को सीमित कर दिया गया है। अब किसी भी शादी में अधिकतम 10 वाहन ही बारात के साथ जा सकेंगे, जिससे अनावश्यक खर्च और सड़कों पर जाम से राहत मिलेगी।
पारंपरिक रस्में समाप्त: फिजूलखर्ची बढ़ाने वाली कुछ पुरानी रस्मों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब सगाई के बाद होने वाली ‘माश खाने’ की रस्म और शादी के तीसरे दिन की जाने वाली ‘पुलटोज (गेरनू-फेरनू)’ की परंपरा नहीं निभाई जाएगी।
मामा की रस्मों में सादगी: भांजे या भांजी की शादी में मामा द्वारा बकरा, अत्यधिक महंगे उपहार लाने और बड़ी संख्या में लोगों को साथ लाने की परंपरा खत्म कर दी गई है। अब केवल सगा मामा ही साधारण तरीके से पारंपरिक रस्में निभाएगा।
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💰 गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में शादियों में दिखावे का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। इस वजह से गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव रहता है और कई बार लोगों को कर्ज तक लेना पड़ता है। इन नए नियमों के लागू होने से विवाह कम खर्च में और सादगी के साथ संपन्न हो सकेंगे, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
⚠️ नियम तोड़ने पर कड़ा एक्शन, 51 हजार लगे जुर्माना
पंचायत प्रधान कमलेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों की अवहेलना करता है, तो उस पर ₹51,000 का नकद जुर्माना लगेगा। साथ ही, दोषी परिवार को पूरी पंचायत के लिए सामूहिक ‘धाम’ का आयोजन करना होगा। लगातार नियम तोड़ने वालों का सामाजिक स्तर पर भी बहिष्कार या अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
