एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग की ओर से विभिन्न संगठनों के साथ आज बचत भवन में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधि, एनजीओ के सदस्य आयोग की कान आँखे हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के साथ कोई अपराध या कुछ भी गलत होता है तो उसकी सूचना कुछ मिनटों में आयोग तक पहुंच जाती है और तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाती है। उन्होंने कहा कि छुआछूत अभिशाप है और इसके खिलाफ सख्त कानून बने हैं लेकिन जब इन कानूनों का पालन नहीं होता है तो फिर कार्रवाई करनी होती है।
रोहड़ू में 12 साल के बच्चे द्वारा आत्महत्या मामले में सच में जातिगत भेदभाव हुआ था। आयोग स्वयं मौके पर गया था और एसएचओ को जांच में लापरवाही बरतने के चलते तुरंत सस्पेंड कर दिया गया था। सैंज घटना के दौरान एक महिला मंडल ने हमें शिकायत दी थी। आयोग ने रिपोर्ट मांगी और उसके बाद मौके पर गए। एक अनुसूचित जाति समुदाय की महिला सिलाई का काम करती थी। उस महिला के साथ कुछ लोगों ने दुष्कर्म किया और हत्या कर दी। पुलिस की जांच में महिला की आत्महत्या का मामला बनाया गया था। जब आयोग ने मामले की जांच विभिन्न पहलुओं पर करने के निर्देश दिए तो पुलिस जांच कमेटी के सदस्यों को कोताही बरतने पर सस्पेंड किया गया। अब इस मामले में सही दिशा में जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा तभी अनुसूचित वर्ग के लोगों को उनके हक मुहैया करवा पाएंगे।
उन्होंने जिला भर में अंबेडकर भवन की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट जिला प्रशासन को देने के निर्देश दिए। आयोग ने कहा कि चियोग स्कूल में दलित छात्रा के हाथों से भोजन न खाने के मामले को लेकर संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की जाएगी। इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आयोग के सदस्य डॉ विजय डोगरा ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आयोग सजगता से कार्य कर रहा है। किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का शोषण नहीं होने देंगे।
भीम पत्र’ का किया विमोचन
बैठक के दौरान आयोग ने ‘भीम पत्र’ का विमोचन भी किया। इस पुस्तिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों तथा उनसे जुड़े प्रमुख प्रावधानों की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 46, 330, 332 और 338 सहित शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। आयोग ने बताया कि भविष्य में केंद्र और प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी वाला एक और विशेष पत्र भी जारी किया जाएगा।
बैठक में प्रतिभागियों ने रखे सुझाव और उठाए अहम मुद्दे
बैठक के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार और सुझाव रखे। पूर्व मेयर सोहन लाल ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को आज भी अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक जागरूक होने का आह्वान किया।
दलित शोषण मुक्ति मंच के जगत राम ने अनुसूचित जाति/जनजाति कंपोनेंट के लिए तेलंगाना की तर्ज पर अलग कानून बनाने की मांग की। उनका कहना था कि इस वर्ग के उत्थान के लिए आवंटित बजट का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने सभी प्रकार की भर्तियों में आरक्षण रोस्टर को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग उठाई।
रोशन लाल डोगरा ने कहा कि यदि संविधान के अनुच्छेद 15 में दिए गए प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए, तो जातिगत भेदभाव से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का समाधान हो सकता है।
गोपाल झीलटा ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के उत्पीड़ित लोगों को कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए प्रशासन की ओर से पर्याप्त कानूनी सहायता उपलब्ध नहीं हो रही है।
बिट्टू पन्ना ने नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की काटी गई वेतन राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की।
राजेश ने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में मिड-डे मील वर्करों से सफाई जैसे अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने चियोग स्कूल में दलित छात्रा के हाथों से परोसा गया भोजन न खाने के कथित मामले को भी प्रमुखता से उठाया।
जिला परिषद सदस्य अनुराधा ने कहा कि संविधान दिवस जैसे कार्यक्रमों में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल अनुसूचित जाति समुदाय तक सीमित न रहकर आमजन की सहभागिता के साथ आयोजित होने चाहिए।
एक आशा कार्यकर्ता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य के दौरान कई स्थानों पर आज भी जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाती हैं।
वहीं ललिता ने कहा कि शिमला शहर में कार्य के दौरान जातिगत भेदभाव के मामले अपेक्षाकृत सामने नहीं आते हैं।
अध्यक्ष व सदस्यों का सम्मान
कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी ने आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान को टोपी और मफलर भेंट कर सम्मानित किया। आयोग के सदस्यों दिग्विजय मल्होत्रा, डॉ. विजय डोगरा और शालिनी जम्वाल का भी जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा सम्मान किया गया।
