एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित कमेटी की बैठकें निथर, शमाथला और देलठ में आयोजित की गईं। बैठकों में परियोजना प्रभावित किसानों की लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा 10 अगस्त को प्रस्तावित देशव्यापी जेल भरो आंदोलन को सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंहा, लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित कमेटी के महासचिव देवकी नंद, प्रेम चौहान और कपिल ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां किसान और मजदूर विरोधी हैं। उनका आरोप था कि सरकार अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं, श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड लागू किए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार, प्रशासन और सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों की लंबित मांगों के समाधान में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार समझौते और सहमति बनने के बावजूद बरकेली गांव, फाटी देहरा, बायल और गड़ेच के किसानों को वर्ष 2021-22 की फसल क्षति का मुआवजा अब तक नहीं मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के लिए भूमि देने वाले 23 परिवारों को आज तक एकमुश्त राशि का भुगतान नहीं किया गया, जबकि इस संबंध में किसान सभा और प्रशासन के बीच सहमति बन चुकी थी। इसके अलावा ग्राम पंचायत निथर, भूट्टी, करांगला और बढ़ाच में मकानों में आई दरारों का सर्वे होने के बावजूद प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है। धूल के कारण फसलों को हुए नुकसान का भी अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया, जिससे किसानों में भारी रोष है।
किसान नेताओं ने कहा कि लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित किसानों की मांगों को लेकर किसान सभा का संघर्ष लगातार जारी है और जब तक सभी लंबित मांगों का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक में हरदयाल कपूर, काकू कश्यप, रीना देवी, इंदिरा, ममता, कमलेश, नीना, सरोजनी, रेखा, निहाल, नरेश, ऋषि, वीरेंद्र, ओम प्रकाश, डाटा राम जिष्टू, मोहर सिंह, जगत सिंह, अंकुश, गीता, प्रकाश, अमी चंद, गुलाबी, कुंजी लाल, चमन, बुद्धि सिंह, हीरा, जोगिंदर, राजेश, रणजीत, डोला राम, निशा, विनता देवी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
