एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
भाजपा नेता कौल सिंह नेगी ने प्रदेश सरकार द्वारा शपथ पत्र और पावर ऑफ अटॉर्नी के शुल्क में की गई बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे आम लोगों, किसानों-बागवानों, छात्रों, बेरोजगार युवाओं और पेंशनधारकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
कौल सिंह नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन 3 सितंबर को सदन में भारतीय स्टांप विधेयक, 2026 पारित किया गया। इसके तहत शपथ पत्र का शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। वहीं, पावर ऑफ अटॉर्नी का शुल्क भी 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा विधायकों ने सदन में इस बढ़ोतरी का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
उन्होंने कहा कि शपथ पत्र आम लोगों के लिए कई जरूरी सरकारी कार्यों में इस्तेमाल होने वाला दस्तावेज है। जाति और आय प्रमाण पत्र, बोनाफाइड, पेंशन, नौकरी, छात्रवृत्ति और हॉस्टल संबंधी कार्यों में भी इसकी आवश्यकता पड़ती है। शुल्क में पांच गुना बढ़ोतरी से छात्रों और बेरोजगार युवाओं पर विशेष आर्थिक बोझ पड़ेगा।
कौल सिंह नेगी ने कहा कि किसानों और बागवानों के जमीन, विरासत और राजस्व संबंधी कार्यों में भी शपथ पत्र की आवश्यकता पड़ती है। वहीं, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विधवा पेंशन और आय प्रमाण पत्र जैसे कार्यों के लिए भी गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अब अधिक राशि खर्च करनी होगी।
उन्होंने कहा कि पावर ऑफ अटॉर्नी का शुल्क बढ़ने से जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण और रजिस्ट्री जैसे कार्य भी महंगे होंगे। उनका कहना है कि स्टांप शुल्क के साथ अन्य शुल्कों में बढ़ोतरी से पहले ही आर्थिक दबाव झेल रही जनता की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार इससे पहले डीजल, बस किराया, पानी, बिजली और स्टांप ड्यूटी समेत कई मदों में बढ़ोतरी कर चुकी है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह व्यवस्था परिवर्तन नहीं, बल्कि लूट परिवर्तन है।” उन्होंने सरकार से शपथ पत्र और पावर ऑफ अटॉर्नी के बढ़े हुए शुल्क को वापस लेने की मांग की।
