एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
डीएवी पब्लिक स्कूल रामपुर में श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर वैदिक सप्ताह एवं संस्कृत दिवस का श्रद्धा, उत्साह और वैदिक परंपराओं के अनुरूप भव्य आयोजन किया गया। पूरे सप्ताह विद्यालय परिसर में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं, संस्कारों और प्रकृति संरक्षण के महत्व से अवगत करवाया गया।
वैदिक सप्ताह के तहत विद्यालय में चार दिवसीय वैदिक हवन का आयोजन किया गया। हवन के दौरान ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद से संबंधित सौ-सौ आहुतियां अग्नि में समर्पित की गईं। प्रतिदिन विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों ने हवन में सहभागिता करते हुए आहुतियां अर्पित कीं तथा विश्व कल्याण, शांति और मानवता के मंगल की कामना की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में सेवा भावना और प्रकृति संरक्षण के संस्कार विकसित करने के उद्देश्य से गौशाला में दान किया गया। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। विद्यालय की ओर से विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और समाज सेवा के महत्व से भी अवगत करवाया गया।
वैदिक सप्ताह के अंतर्गत सात्विक भोजन दिवस भी मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने घर से सात्विक एवं पौष्टिक भोजन लाकर उसका सेवन किया। विद्यालय में विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति में सात्विक एवं संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी गई।
महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों से विद्यार्थियों को करवाया अवगत
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. वर्षा सूद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों के प्रचार-प्रसार और समाज सुधार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उनके विचारों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से डीएवी संस्थाओं की स्थापना की गई, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक मूल्यों एवं संस्कारों का समावेश किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज उत्थान के लिए किए गए कार्यों और उनके त्याग से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि वैदिक हवन और इस प्रकार के आयोजन केवल धार्मिक परंपराओं के निर्वहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, सेवा भावना, पर्यावरण संरक्षण और वैदिक जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित होती है। वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, हवन की सुगंध और विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों की सामूहिक सहभागिता से विद्यालय परिसर पूरे सप्ताह आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी वातावरण से सराबोर रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
