एआरबी टाइम्स ब्यूरो, नई दिल्ली
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से भेंट की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश के विद्युत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण एवं लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और इनके शीघ्र समाधान का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के निःशुल्क विद्युत हिस्से के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र (REC) प्रदान करने का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने निःशुल्क विद्युत हिस्से का उचित लाभ मिलना चाहिए तथा इस संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण और समाधान प्रदान किया जाना चाहिए।
उन्होंने सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) के निदेशक मंडल में हिमाचल प्रदेश की ओर से दो स्वतंत्र निदेशकों के नामांकन का मामला भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए नामांकन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री ने शानन जल विद्युत परियोजना को हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस संबंध में मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
उन्होंने वर्ष 2008 की जलविद्युत नीति लागू होने से पहले शुरू की गई केंद्रीय क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए परियोजना शुरू होने के बाद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (LADF) के रूप में एक प्रतिशत अतिरिक्त मुफ्त बिजली प्रदान करने की राज्य की मांग दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रावधान से परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, इस व्यवस्था से हिमाचल प्रदेश को लगभग 29.34 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ मिलने की संभावना है, जबकि अन्य लाभार्थी राज्यों पर लगभग 96.57 करोड़ रुपये का वार्षिक भार पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश का अनुमानित शुद्ध वार्षिक लाभ करीब 23.21 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि अन्य लाभार्थी राज्यों पर टैरिफ प्रभाव लगभग 1.15 प्रतिशत होगा।मुख्यमंत्री ने 180 मेगावाट क्षमता की बैरा स्यूल जल विद्युत परियोजना को 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित करने का मामला भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने राज्य के हित में परियोजना के हस्तांतरण की आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा प्रदेश में अधिकृत ऐसी भूमि, जिसका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है, को हिमाचल प्रदेश सरकार को उपलब्ध करवाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसी भूमि का उपयोग सरकारी कार्यालयों के निर्माण के साथ-साथ परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेश के व्यापक हित में ऐसी भूमि के उपयोग की अनुमति देने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में राज्य के विद्युत हितों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान प्रदेश के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे।
