एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 पर हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी और महासचिव इंदर ठाकुर सहित पदाधिकारियों ने ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा डिफर करने के निर्णय पर सरकार से तत्काल पुनर्विचार की मांग की है।
संघ के अनुसार, ग्रुप-बी कर्मचारी प्रदेश के मध्यवर्गीय वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ये कर्मचारी पहले से ही हाउस लोन, वाहन लोन, बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा खर्चों के दबाव में हैं। ऐसे में वेतन का एक हिस्सा स्थगित करने का निर्णय उनके मासिक बजट और जीवन-यापन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
अजय नेगी ने कहा कि बढ़ती महंगाई ने कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते खर्च के बीच वेतन डिफर करना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने इसे कर्मचारी हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से इस फैसले पर संवेदनशीलता के साथ पुनर्विचार करने की अपील की।
संघ ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को इस बजट से महंगाई भत्ते (DA) की किस्त जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस घोषणा न होने से कर्मचारियों में निराशा है। उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का अधिकार है और इसे समयबद्ध तरीके से जारी किया जाना चाहिए। हालांकि, संघ ने शिक्षा क्षेत्र में बागवानी (Horticulture) विषय शुरू करने के निर्णय का स्वागत किया। उनका मानना है कि इससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
