एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत एवं नगर पालिका आदर्श आचार संहिता, 2020 की धारा 2.1 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इस संबंध में जारी अधिसूचना में आयोग ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं। पंचायतों और शहरी निकायों के चुनावी माहौल के बीच यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीमांकन, क्षेत्रफल और वर्गीकरण में बदलाव पर रोक
आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब पंचायतों और नगर निकायों की सीमाओं, क्षेत्रफल और वर्गीकरण में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा। एक बार अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी प्रकार का संशोधन प्रतिबंधित रहेगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि चुनावी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत पूर्व निर्धारित अवधि के अनुसार पहले ही शुरू हो चुकी है।
छह महीने पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य
आयोग ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार पंचायत और नगर निकायों की चुनाव प्रक्रिया मौजूदा निकायों का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम छह माह पूर्व शुरू की जानी आवश्यक है। इसी निर्देश के तहत हिमाचल में 1 अगस्त से चुनावी प्रक्रिया को प्रारंभ कर दिया गया था।
सीमांकन प्रक्रिया पूर्ण, मतदाता सूचियों का प्रकाशन जारी
राज्य में पंचायती राज संस्थाओं की 3577 ग्राम पंचायतों, 90 पंचायत समितियों, 11 जिला परिषदों और 71 शहरी निकायों का सीमांकन कार्य पूर्ण कर अंतिम रूप से प्रकाशित कर दिया गया है।
आयोग के अनुसार 3548 ग्राम पंचायतों और 70 नगर निकायों की मतदाता सूचियां विधि अनुसार तैयार हो चुकी हैं। शेष 29 ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियां 1 दिसंबर को तथा एक नगर निकाय की मतदाता सूची 7 दिसंबर 2025 को अंतिम रूप से प्रकाशित की जाएगी।
शहरी निकायों का सीमांकन पहले ही अंतिम रूप में
आयोग ने बताया कि शहरी निकायों का सीमांकन 1 मई, 4 जुलाई तथा 28 जुलाई 2025 को ही अंतिम रूप से प्रकाशित किया जा चुका है। अब इसमें किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा।
किन-किन का कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है
| निकाय | कार्यकाल की समाप्ति |
|---|---|
| पंचायती राज संस्थाएं | 31 जनवरी 2026 |
| शहरी निकाय (50) | 18 जनवरी 2026 |
| चार नगर निगम (धर्मशाला, पालमपुर, मंडी, सोलन) | 13 अप्रैल 2026 |
| नगर पंचायतें (अंब, चिरगांव, कंडाघाट, नेरवा, निरमंड) | 16 अप्रैल 2026 |
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (एसएलपी नं. 22468, 22469/2024) के अनुसार चुनाव प्रक्रिया मौजूदा निकायों की अवधि समाप्त होने से कम से कम छह महीने पूर्व प्रारंभ करना अनिवार्य है। इसी दिशा-निर्देश के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने समयबद्ध चुनावी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए धारा 2.1 लागू की है।
