एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | दिवाली के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं। शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) देने का ऐलान किया। इसमें 4 प्रतिशत मौजूदा डीए के साथ पिछले साल का 1 प्रतिशत लंबित डीए भी शामिल है। इस बढ़ोतरी के साथ ही कर्मचारियों का कुल डीए 45 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है, जिसका बढ़ा हुआ लाभ नवंबर के वेतन के साथ मिलेगा।
मुख्यमंत्री की इस घोषणा से प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना 1 नवंबर को जारी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने वित्तीय राहत देते हुए क्लास-4 कर्मचारियों को 5 प्रतिशत डीए के अलावा 10,000 रुपये एरियर और पेंशनरों को भी 10,000 रुपये देने की घोषणा की है।
प्रदेश की वित्तीय स्थिति और कर्ज पर आंकड़े
प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए कर्ज से जुड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हिमाचल प्रदेश पर कुल 99,564 करोड़ रुपये का कर्ज है। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के उस दावे को खारिज किया जिसमें प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज होने की बात कही गई थी। सुक्खू ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि जयराम ठाकुर के पांच साल के कार्यकाल में 43,261 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था, जबकि उनकी सरकार ने 22 अक्टूबर 2026 तक 37,781 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।
प्रमुख राजनीतिक और नीतिगत मुद्दे
राज्य से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने किशाऊ बांध और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के मुद्दों पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि किशाऊ बांध मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के दौरान जब हिमाचल के हितों की अनदेखी जैसी स्थिति बनी, तो उन्होंने कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद राज्य की शर्तों को स्वीकार किया गया। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बीबीएमबी के मामलों में भी प्रदेश के अधिकारों और हितों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।वहीं, प्रदेश में सरकार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना और विरोध जताना जनता तथा कर्मचारियों का अधिकार है।
