एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश सरकार ने पेंशनरों के लंबित एरियर के भुगतान को लेकर बड़ा एलान किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए क्लास-III पेंशनरों को उनके पेंशन एरियर का 30 प्रतिशत, जबकि क्लास-I और क्लास-II पेंशनरों को 15 प्रतिशत एरियर अक्तूबर 2026 में दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए की। उन्होंने कहा कि सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं से अवगत है और इनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय लाभ देती रही है। सरकार अब महंगाई भत्ते (डीए) की एक और किस्त जारी करने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का भुगतान करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। वहीं, 65 वर्ष से अधिक आयु वाले पेंशनरों का एरियर पहले ही जारी किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
आरडीजी को लेकर केंद्र पर भी उठाया सवाल
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के समय पूर्व भाजपा सरकार प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई थी। इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनरों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी थीं। मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल को वर्ष 1952 से यह अनुदान मिलता रहा है, लेकिन उनके अनुसार 16वें वित्त आयोग के बाद इसमें बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि आरडीजी को केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का अधिकार माना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आरडीजी में कमी के कारण हिमाचल को हर साल करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
पिछली सरकार की वित्तीय नीतियों पर उठाए सवाल
सुक्खू ने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में हिमाचल को 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में मिले थे। उनके अनुसार यदि उस दौरान वित्तीय अनुशासन कायम रखा जाता तो प्रदेश का कर्ज करीब 30 हजार करोड़ रुपये कम हो सकता था और कर्मचारियों से जुड़ी देनदारियों का भी भुगतान किया जा सकता था।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण कराया गया, जिनमें से कई वर्तमान में खाली हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में करीब 17 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए हैं और सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।
पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट ने जताया आभार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के हर फैसले का उद्देश्य हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। बैठक में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने पेंशनरों के हित में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। बैठक में ज्वाइंट फ्रंट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे।
