एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) की क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की भाजपा नेतृत्व वाली सरकारों पर मजदूर आंदोलनों के दमन का आरोप लगाते हुए रामपुर, दत्तनगर, निरथ और बायल में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और पूरे एनसीआर में चल रहे मजदूर संघर्षों के समर्थन में आयोजित किया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए CITU शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा सहित अन्य नेताओं ने कहा कि यह केवल औद्योगिक विवाद नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य तंत्र कॉरपोरेट हितों की रक्षा करते हुए श्रमिकों की आवाज को दबाने में लगा है। नेताओं ने देशभर के औद्योगिक मजदूरों से एकजुट होकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
नेताओं के अनुसार, 9 अप्रैल से नोएडा फेज-2 से शुरू हुआ आंदोलन तेजी से एनसीआर के कई औद्योगिक क्षेत्रों में फैल गया है, जिसमें हजारों मजदूर शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन फरवरी में हुई आम हड़ताल की निरंतरता है और मजदूरों की बढ़ती एकता का परिणाम है।
CITU ने आरोप लगाया कि ठेका मजदूरों का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है। उन्हें 10-12 हजार रुपये मासिक वेतन पर 10-13 घंटे तक काम करने को मजबूर किया जाता है, जबकि बुनियादी सुविधाएं जैसे ईएसआई, पीएफ और सुरक्षा तक उपलब्ध नहीं हैं। बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए 26,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी की मांग को उन्होंने आवश्यक बताया।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सैकड़ों मजदूरों को गिरफ्तार किया गया है और उनके परिवारों को भी परेशान किया जा रहा है। महिला मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार और ट्रेड यूनियन नेताओं की गिरफ्तारी की भी निंदा की गई।
CITU ने सभी गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई, झूठे मामलों की वापसी, दमन की समाप्ति और 8 घंटे कार्यदिवस लागू करने की मांग उठाई। साथ ही, ठेका प्रथा समाप्त कर मजदूरों के नियमितीकरण और श्रम अधिकारों की बहाली पर जोर दिया गया।
