एआरबी टाइम्स ब्यूरो | बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (एचपीसीडीपी-चरण-2) के तहत जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) के सहयोग से संचालित गतिविधियों के अंतर्गत खंड परियोजना प्रबंधन इकाई, बिलासपुर के अधिकारियों ने ग्राम छकोह का दौरा कर टमाटर उत्पादक किसानों के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान फसल की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के साथ किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। परियोजना क्षेत्र में करीब 30 किसान 30 बीघा भूमि पर व्यावसायिक स्तर पर टमाटर की खेती कर रहे हैं, जो क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
निरीक्षण के दौरान खंड परियोजना प्रबंधक पवन कुमार और कृषि प्रसार अधिकारी मोहित नायक ने खेतों में जाकर फसल की वृद्धि, पौधों के स्वास्थ्य, उत्पादन क्षमता और फसल प्रबंधन गतिविधियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर किसान राम रतन, चमेल सिंह सहित अन्य टमाटर उत्पादक किसान भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने किसानों से खेती के अनुभव, उत्पादन संबंधी चुनौतियों और बाजार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
पवन कुमार ने किसानों को टमाटर फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों की समय पर पहचान तथा उनके प्रभावी नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम), संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण संबंधी उपाय अपनाने की सलाह भी दी गई।
उन्होंने बताया कि टमाटर जैसी नगदी फसलों में निराई-गुड़ाई, समयबद्ध सिंचाई, पौधों की स्टेकिंग तथा अन्य वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का विशेष महत्व है। इन उपायों से उत्पादन बढ़ने के साथ फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है। अधिकारियों ने किसानों को परियोजना के माध्यम से उपलब्ध तकनीकी सहायता और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि परियोजना के तहत किए जा रहे प्रयास क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को नई दिशा देंगे और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।
इस दौरान किसानों ने भी अपनी समस्याएं और अनुभव अधिकारियों के साथ साझा किए, जिन पर उन्हें आवश्यक तकनीकी परामर्श प्रदान किया गया। किसानों ने परियोजना के माध्यम से मिल रहे सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें वैज्ञानिक ढंग से खेती करने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल रही है।

