एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल की नरैण पंचायत में क्षेत्र के आराध्य देवता चतरखंड पंचवीर साहिब का पावन जन्मोत्सव वीरवार को पूरे श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था इतनी प्रबल रही कि अलसुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई और दोपहर तक मंदिर परिसर पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया। जन्मोत्सव के अवसर पर न केवल नरैण पंचायत बल्कि आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु देवता पंचवीर साहिब का आशीर्वाद लेने पहुंचे।

देवता चतरखंड पंचवीर साहिब की जय के जयकारे गूंजे
मान्यता है कि देवता चतरखंड पंचवीर साहिब के जन्मदिवस पर मंदिर में हाजिरी भरने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इसी आस्था के चलते ठंड और कठिन मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। वीरवार सुबह करीब छह बजे मंदिर के कपाट विधिवत रूप से खोले गए। इसके बाद देवता साहिब अपने मंदिर से बाहर निकले। देवता के दर्शन होते ही मंदिर परिसर “देवता चतरखंड पंचवीर साहिब की जय” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर नतमस्तक होकर देवता साहिब का स्वागत किया। वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच देवलुओं द्वारा देवता साहिब को उनके उद्गम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और शंखनाद ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। उद्गम स्थल पर पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किए गए। देवता साहिब के गुर ने दशकों पुरानी बामण डालने की परंपरा का निर्वहन किया, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ देखा।
वर्ष भर इंतजार करते हैं जन्मोत्सव का
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे देवता पंचवीर साहिब के जन्मोत्सव का पूरे वर्ष इंतजार करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है। दिनभर मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलती रही। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की ताल पर नाटी डालते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है कि देवता चतरखंड पंचवीर साहिब अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते और सदैव उन पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। जन्मोत्सव का यह पावन अवसर एक बार फिर इस विश्वास को मजबूत करता नजर आया।
