एआरबी टाइम्स ब्यूरो
किन्नौर। उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने आज जिला के काशंग कंडा और सांगला कंडा में बनी कृत्रिम झीलों से उत्पन्न खतरे को लेकर एक महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य इन झीलों के फटने की स्थिति में मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।उपायुक्त ने बताया कि इन कृत्रिम झीलों पर गत वर्ष एक विशेषज्ञ शोध दल द्वारा अध्ययन करवाया गया था, जिसकी रिपोर्ट में झीलों से संभावित नुकसान और उससे निपटने के उपाय बताए गए हैं।
बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ये झीलें गंभीर चिंता का विषय हैं और इनका समाधान अत्यंत संवेदनशीलता से किया जाना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाए, साथ ही एक प्रभावी संचार और निकासी योजना भी तैयार की जाए।
विशेष रूप से सांगला कंडा झील के बारे में बताया गया कि यदि यह झील फटती है, तो लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए केवल एक घंटा 20 मिनट का समय मिलेगा। उपायुक्त ने इस अवसर पर विद्युत परियोजनाओं के बांध सुरक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सिक्किम के तीस्ता बांध के 2023 के मानसून में हुए हादसे का अध्ययन करें और उससे सीख लेकर अपने आपदा बचाव योजनाओं को मजबूत करें।
इस बैठक में पुलिस अधीक्षक अभिषेक शेखर, उपमंडलाधिकारी कल्पा अमित कल्थाईक, जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता अभिषेक शर्मा, जिला विकास अधिकारी प्यारे लाल नेगी, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से रजनीश कुमार, काशंग और कड़छम-वांगतू जल विद्युत परियोजनाओं के अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
