एआरबी टाइम्स ब्यूरो
कुल्लू। जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) के तहत जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी ने कुल्लू, लाहौल-स्पीति और मंडी के किसानों के लिए शिमला व सोलन में तीन दिवसीय अध्ययन दौरा सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, मशरूम उत्पादन और कृषि व्यवसाय विकास से संबंधित नवीनतम जानकारियां प्रदान करना था।
शिमला-सोलन दौरे के दौरान किसानों को सोलन स्थित आईसीएआर-डीएमआर मशरूम केंद्र के विशेषज्ञों ने मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया, नियंत्रित तापमान और नमी बनाए रखने के महत्व, मशरूम के बीज तैयार करने, उत्पादन बढ़ाने तथा बटन, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम की पहचान करने की विस्तृत जानकारी दी। इस प्रशिक्षण से किसानों को मूल्य संवर्धन और बेहतर आय के अवसरों के बारे में भी जागरूकता मिली।
दूसरे दिन किसानों ने डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) का भ्रमण किया। मृदा विज्ञान विभाग में मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक संतुलन और जैविक उर्वरता प्रबंधन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। साथ ही, फ्लोरीकल्चर विभाग ने फूलों की उन्नत किस्मों और खेती के आधुनिक तरीकों का परिचय करवाया। खाद्य प्रसंस्करण विभाग में बेकरी उत्पाद, जैम, जैली, कैंडी और अचार बनाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे किसानों को अपने उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर बेहतर लाभ कमाने में मदद मिलेगी। सब्ज़ी विज्ञान विभाग में सब्जियों की उन्नत किस्में और कीट-रोग प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
तीसरे दिन किसानों ने शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में भाग लिया, जिसका मुख्य विषय था “कृषि सशक्तिकरण: सतत खेती और फसल विविधीकरण हेतु एग्री-टेक साझेदारियाँ” और “कृषि व्यवसाय विकास: संभावनाएँ और अवसर”। विशेषज्ञों ने किसानों को एग्री-टेक स्टार्टअप्स, जलवायु अनुकूल खेती, और कृषि उत्पादों के विपणन के आधुनिक तरीकों पर मार्गदर्शन दिया। किसानों ने नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करने और लाभ बढ़ाने के उपायों को समझा।
यह तीन दिवसीय अध्ययन दौरा किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी रहा, जिसमें उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान और नवीनतम कृषि तकनीकों से परिचय प्राप्त किया। किसानों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भविष्य में नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की, जिससे वे निरंतर विकसित होती कृषि तकनीकों से अपडेट रह सकें और अपनी आय में सुधार कर सकें।
