एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
रामपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा नेता कौल सिंह नेगी ने रामपुर और ननखड़ी क्षेत्र में सी-ग्रेड सेब की खरीद शुरू न होने पर प्रदेश सरकार और हिमफेड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बागवानों के हित में तत्काल खरीद शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिमफेड द्वारा स्थापित सभी खरीद केंद्रों पर बिना देरी के खरीद प्रक्रिया शुरू की जाए और पिछले वर्षों के अनुरूप खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जाए।
उन्होंने बताया कि रामपुर उपमंडल के निचले क्षेत्रों में सेब सीजन जुलाई में ही शुरू हो गया था। निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन लगभग समाप्त हो चुका है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में इन दिनों सेब तुड़ान जारी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर हिमफेड के खरीद केंद्रों में अब तक सी-ग्रेड सेब की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में एचपीएमसी मंडी मध्यस्थता योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर सी-ग्रेड सेब खरीद केंद्र संचालित करता था। इस वर्ष सरकार ने यह जिम्मेदारी हिमफेड को सौंपी है, लेकिन खरीद केंद्रों की संख्या में काफी कमी कर दी गई है।
भाजपा नेता के अनुसार, पिछले वर्ष ननखड़ी ब्लॉक में एचपीएमसी के 14 खरीद केंद्र संचालित थे, जबकि इस बार हिमफेड ने केवल पांच केंद्र स्थापित किए हैं। इसी तरह रामपुर ब्लॉक में पिछले वर्ष 12 खरीद केंद्र थे, लेकिन इस बार केवल खनोग में एक केंद्र खोला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, वहां भी अब तक खरीद शुरू नहीं हुई है। इससे निचले क्षेत्रों में सीजन समाप्त होने के बाद गर्मी के कारण सी-ग्रेड सेब खराब होने का खतरा बढ़ गया है और बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कौल सिंह नेगी ने कहा कि इस वर्ष पहले ही सेब उत्पादन प्रभावित रहा है, जिससे बागवान आर्थिक दबाव में हैं। ऐसे में समय पर सी-ग्रेड सेब की खरीद नहीं होने से उनकी परेशानियां और बढ़ेंगी। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि हिमफेड के सभी स्थापित खरीद केंद्रों पर तत्काल खरीद शुरू करवाई जाए तथा पिछले वर्ष की तरह पर्याप्त संख्या में नए खरीद केंद्र खोले जाएं, ताकि बागवानों को दूर-दराज के क्षेत्रों तक सेब ढोने पर अतिरिक्त खर्च न उठाना पड़े।
इसके साथ ही उन्होंने खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि पोर्टल, दस्तावेजी औपचारिकताओं और अन्य प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए, ताकि बागवानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बागवानी हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और बागवानों को समय पर राहत देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
