एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
राजधानी शिमला में शनिवार सुबह बड़ा हादसा टल गया, जब भट्टाकुफर चौक पर अचानक सड़क धंसने से बना 10–15 फीट गहरा गड्ढा एक स्कूल की बच्ची को अपने साथ नीचे ले गया। बच्ची को तुरंत बचाव अभियान चलाकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के समय ऑकलैंड हाउस स्कूल के बच्चों को लेकर जा रही एचआरटीसी बस वहीं खड़ी थी और उसका एक टायर भी गड्ढे में धंस गया। जानकारी के मुताबिक, सुबह बस जैसे ही भट्टाकुफर चौक पर रुकी, सड़क के बीचोबीच अचानक बड़ा धंसाव हो गया। उसी दौरान बस में चढ़ने का प्रयास कर रही बच्ची का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे गड्ढे में जा गिरी।
स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत मौके पर रेस्क्यू शुरू किया। रस्सियों की मदद से बच्ची को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। बच्ची को मामूली चोटें आई हैं और वह अब सुरक्षित है। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पार्षद नरेंद्र ठाकुर का गुस्सा एनएचएआई और फोर-लेन निर्माण कर रही कंपनी पर फूट पड़ा। क्षेत्र में ढली फोर-लेन और टनल निर्माण का कार्य जारी है और लोगों का आरोप है कि इसी निर्माण के कारण जमीन कमजोर हुई है।
पार्षद ने कहा कि एनएचएआई और कंपनी की लापरवाही के चलते लगातार नुकसान हो रहा है। मकानों में दरारें, नींव कमजोर होना और अब सड़क धंसना… ये सब गंभीर चेतावनियां हैं। अब बच्चों की जान तक खतरे में पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा इलाका खतरे में है, तो निर्माण गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हो रही और जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से क्षेत्र में जमीन धंसने और कंपन महसूस होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई मकानों की दीवारों और नींव में डेवलपमेंट के बाद से दरारें आ चुकी हैं। लोगों का आरोप है कि सड़क के नीचे सुरंग बनने से मिट्टी का सहारा कम हुआ है, और आज की घटना उसी का नतीजा है।
मुआवजा नहीं, सुरक्षा चाहिए
लोगों ने कहा कि केवल मुआवजा देना समाधान नहीं है। यदि किसी भवन की नींव हिल जाए, तो पैसे से उसकी सुरक्षा वापस नहीं लाई जा सकती। यह घटना बताती है कि निर्माण मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। आज बच्ची सुरक्षित है, लेकिन कल किसी की जान जा सकती है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग एनएचएआई के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। नागरिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से तत्काल कार्रवाई और निर्माण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सड़क धंसने की जांच शुरू कर दी गई है और एनएचएआई से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि लोगों का कहना है कि सालों से केवल जांच ही होती आ रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
एक बार फिर शिमला में एनएचएआई की ओर से किए जा रहे फोर-लेन निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। भट्टाकुफर चौक पर निर्माणाधीन सड़क अचानक धंस गई, जिससे बीच सड़क में बड़ा गड्ढा बन गया और उसमें बच्ची गिर गई। यह घटना बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहले भी लापरवाही और निम्न गुणवत्ता के चलते कई इमारतें ढह चुकी हैं और अनेक इमारतें जोखिम की स्थिति में हैं। लेकिन अब सड़क धंसने की घटनाएं सीधे बच्चों और आम नागरिकों की जान पर खतरा बनती जा रही हैं। यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्य में मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे जनता का विश्वास लगातार टूट रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए माननीय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह है कि वे इस घटना का संज्ञान लें, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और फोर-लेन परियोजना की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करवाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
-अनिरूद्ध सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री, हिमाचल प्रदेश सरकार
