एआरबी टाइम्स ब्यूरो, ऊना
हिमाचल प्रदेश में स्थापित होने जा रहे बल्क ड्रग पार्क को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी मिल गई है। इस स्वीकृति के साथ फार्मास्युटिकल क्षेत्र की भारत की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक के रास्ते में आई बाधा दूर हो गई है। इस परियोजना का उद्देश्य दवाओं में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) और प्रमुख कच्चे माल (KSM) के लिए अन्य देशों पर निर्भरता को कम करना है।
परियोजना की प्रमुख बातें
भारत सरकार से 996.45 करोड़ रुपये और राज्य सरकार से 1,074.55 करोड़ रुपये का अनुदान।
परियोजना में 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक निवेश क्षमता।
15,000 से 20,000 तक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद।
क्रियान्वयन एजेंसी: हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (SPV)।
दवा निर्माण का अग्रणी केंद्र बनाए यह पार्क : सुक्खू
जनवरी 2025 में पर्यावरण मूल्यांकन समिति (EAC) की बैठक में इस परियोजना पर चर्चा हुई थी। इसके बाद NIT हमीरपुर से जल निकासी, भूकंपीय भेद्यता, भूस्खलन जोखिम, पारिस्थितिकी में न्यूनतम गड़बड़ी और जोखिम मूल्यांकन से जुड़ी तकनीकी रिपोर्ट तैयार की गई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पार्क हिमाचल को दवा निर्माण का अग्रणी केंद्र बनाएगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह मंजूरी विकास के अगले चरणों को तेजी से आगे बढ़ाएगी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगी। उद्योग विभाग के निदेशक आर.डी. नजीम और डॉ. यूनुस ने भरोसा दिलाया कि इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स और हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसे राज्य के लिए फार्मा सेक्टर में नया युग करार दिया।