एआरबी टाइम्स ब्यूरो
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश के एक चर्चित एनडीपीएस मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द करते हुए आरोपी सुरेश कुमार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कोटपा अधिनियम के अंतर्गत घने जंगल में बीड़ी पीना कोई अपराध नहीं है, क्योंकि यह सार्वजनिक स्थल की श्रेणी में नहीं आता।
मामला सितंबर 2016 का है, जब ढली पुलिस थाना क्षेत्र में पुलिस ने सुरेश कुमार को जंगल में बीड़ी पीते हुए पकड़ा था। पुलिस का दावा था कि बीड़ी से चरस की गंध आ रही थी और उसके पास से 2.98 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके आधार पर एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।
21 सितंबर 2022 को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक महीने की कैद और ₹1000 जुर्माने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी।
सत्र न्यायालय की टिप्पणी:
सत्र न्यायालय ने कहा कि ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों की समुचित व्याख्या करने में असफल रहा। अभियोजन पक्ष की कहानी विरोधाभासी थी और यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी सार्वजनिक स्थान पर तंबाकू उत्पाद का सेवन कर रहा था। चूंकि आरोपी एक सुनसान जंगल में था, इसलिए कोटपा अधिनियम लागू नहीं होता।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल गंध के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है, जब तक कि ठोस साक्ष्य मौजूद न हों। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।
