एआरबी टाइम्स ब्यूरो
रामपुर बुशहर। एसजेवीएनएल की तीन प्रमुख परियोजनाओं — 1500 मेगावाट बायल, 412 मेगावाट रामपुर और 210 मेगावाट लुहरी में कार्यरत ठेका मजदूरों के संघर्ष को बड़ी सफलता मिली है। 1 जुलाई 2025 से शुरू हुए अनिश्चितकालीन धरने के 77वें दिन यानी 15 सितंबर 2025 को मजदूर यूनियनों और एसजेवीएनएल प्रबंधन के बीच श्रम विभाग चंडीगढ़ (ALC) की मध्यस्थता में ऐतिहासिक लिखित समझौता हुआ।
धरना सीटू (CITU) से संबंधित यूनियनों द्वारा आयोजित किया गया था। मजदूरों की प्रमुख मांगें थी – बीमा सुविधा, ग्रेच्युटी भुगतान, प्रमोशन पॉलिसी और काम के अनुसार पदनाम।
2 साल पुराने मांगपत्र के बावजूद अनदेखी
यूनियनों ने बताया कि 23 जून 2023 को एसजेवीएनएल प्रबंधन को मांगपत्र सौंपा गया था, लेकिन 2 साल तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मजबूरी में मजदूरों ने संविधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शांतिपूर्ण धरना शुरू किया।
मजदूर नेताओं का बयान
सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, अमित, बालकराम, नीलदत्त, कामराज, गुरदास, तिलक, मिलाप नेगी, प्रमोद और किसान सभा जिला सचिव देवकी नंद व दयाल भाटनु ने आम सभा को संबोधित करते हुए कहा:
“एसजेवीएनएल जैसी नवरत्न कंपनी में मजदूरों को ग्रेच्युटी और बीमा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही थीं। काम कुशल मजदूरों को अकुशल वेतन दिया जा रहा है। यह श्रम कानूनों की खुली अवहेलना है।”
समझौते की प्रमुख बातें:
मजदूरों का बीमा 1 जनवरी 2025 से लागू किया जाएगा।
ग्रेच्युटी पर निर्णय अगली BOD मीटिंग (3 माह के भीतर) में लिया जाएगा।
प्रमोशन पॉलिसी व काम के अनुसार पदनाम जैसे मुद्दों पर स्थानीय प्रबंधन से बैठक कर निर्णय लिया जाएगा।
बैठक की तिथि लिखित रूप में तय की गई है और श्रम विभाग की निगरानी में होगी।
प्रबंधन को चेतावनी
आम सभा में मजदूर नेताओं ने कहा कि यदि इस लिखित समझौते को लागू नहीं किया गया या भाई-भतीजावाद व उत्पीड़न की कोशिश की गई, तो यूनियन फिर से आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगी।
औद्योगिक शांति की अपील
सीटू नेताओं ने कहा कि यूनियनों ने हमेशा औद्योगिक शांति और श्रम कानूनों के सम्मान की वकालत की है, लेकिन प्रबंधन की लापरवाही और टालमटोल के कारण यह संघर्ष करना पड़ा। अगर पहले ही गंभीरता दिखाई जाती, तो धरने की नौबत नहीं आती।
