एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश के सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी के बढ़ते जलस्तर और सिल्ट जमा होने के कारण उत्पन्न खतरों पर गंभीरता दिखाते हुए उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनटीपीसी और लोक निर्माण विभाग ने विस्तृत रिपोर्टें सौंपीं, जिनका अब विशेषज्ञों की टीम द्वारा अध्ययन करवाया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि कोलडैम प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता है। पिछले तीन वर्षों से मानसून के दौरान सतलुज नदी के जलस्तर में वृद्धि से सुन्नी, तत्तापानी और चाबा क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में इस खतरे को कम करने के लिए डिसिल्टिंग (Disilting) की योजना बनाई जाएगी।
लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट:
लोक निर्माण विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कोलडैम के निर्माण के बाद से सतलुज नदी के तल में भौगोलिक और संरचनात्मक बदलाव तेजी से सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 30 मार्च 2015 को कोलडैम की कमीशनिंग हुई थी, जिसकी ऑपरेशन अवधि 30 वर्ष निर्धारित है और न्यूनतम जलस्तर 636 मीटर तय किया गया है। लेकिन बीते वर्षों में नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि और सिल्ट (गाद) जमाव ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
प्रमुख घटनाएं और क्षति:
2018-19: कोलडैम के जल संचय के कारण पहली बार नदी में जल स्तर बढ़ा और सिल्ट जमा हुआ, जिससे चाबा हाइड्रो पावर स्टेशन को नुकसान पहुंचा। चाबा का 70 मीटर लंबा सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ। शिमला-मंडी मार्ग के कई हिस्सों में भारी कटाव (erosion) हुआ। एनटीपीसी ने सड़क मरम्मत के लिए ₹1.72 करोड़ की राशि उपलब्ध करवाई, कार्य 2019 में पूर्ण हुआ। 2023 में चाबा ब्रिज पूरी तरह ढह गया, इसकी मरम्मत लागत ₹15 करोड़ अनुमानित। सुन्नी स्थित सरकारी आईटीआई परिसर, वन विभाग का विश्राम गृह और गौशाला नदी की चपेट में आए।शिमला-मंडी मार्ग फिर कई जगह से क्षतिग्रस्त हुआ।थली ब्रिज भी जल स्तर बढ़ने से क्षतिग्रस्त हुआ और मरम्मत पर ₹1.5 करोड़ खर्च हुआ। इसी तरह 2025 में 21 जुलाई को थली ब्रिज पर ₹5 लाख का नुकसान। 13 अगस्त: और अधिक क्षति; रेजिंग डेक की मरम्मत के लिए ₹8 करोड़ की लागत आंकी गई। शिमला-मंडी रोड की पूर्ण मरम्मत के लिए ₹29 करोड़ का अनुमानित लागत है
एनटीपीसी की रिपोर्ट
एनटीपीसी ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि आईआईटी रूढ़की की टीम ने सतलुज नदी के सिल्ट पर विस्तृत अध्ययन किया है। वर्ष 2014 से 2024 तक के समय को आधार बनाकर अध्ययन किया गया है। इसमें रिमोट सेंसिग, जीआईएस, मल्टी डेट, मल्टी सेंसर सेटेलाइट डाटा का इस्तेमाल किया गया । सिल्ट का अध्ययन जोन वन – तत्तापानी, जोन टू-सुन्नी और जोन तीन-चाबा का है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 के बाद सिल्ट में बदलाव दर्ज किया गया है। वर्ष 2014 से 2021 तक सिल्ट में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया। वर्ष 2022 और 2023 में भारी बाढ़ आने के कारण रूपात्मक विशेषताएं बदली है। सुन्नी, तत्तापानी और सतलुज के अपस्ट्रीम में नजर आने वाला अवसादन एकत्रित हुआ है। वर्ष 2023 में 2861 मिलियन क्यूबिक मीटर सिप्लेज दर्ज की गई है, जोकि कोलडैम के कमीशन होने के बाद का सबसे अधिक है। वहीं इसी वर्ष सिल्ट कन्सट्रेशन 7120 प्रति मिलियन भाग दर्ज किया गया है।
जोन 1 तत्तापानी में वर्ष 2022 में सिल्ट 7 हेक्टेयर और 2023 में 27 हेक्टेयर दर्ज हुई। जोन 2 सुन्नी में वर्ष 2022 में 0.5 हेक्टेयर और 10 हेक्टेयर 2023 में रिकॉर्ड की गई। वहीं जोन 3 चाबा में वर्ष 2022 में 1.7 हेक्टेयर से वर्ष 2023 में 8 हेक्टेयर सिल्ट दर्ज की गई है। सिल्ट से कारण पहली बार कोलडेम को 11 जुलाई 2023 को बंद करना पड़ा था।
इस रिपोर्ट के मुताबिक सुन्नी क्षेत्र में एकत्रित सिल्ट भवन निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त बताई गई है। रिपोर्ट में सही तरीके से सिल्ट की माइनिंग करने का सुझाव दिया गया है ताकि पानी के जलस्तर को कम किया जा सके। एनटीपीसी माइनिंग के लिए एनओसी राज्य सरकार को देने के लिए तैयार है।