एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश को शहरी प्रशासन को सशक्त बनाने के लिए बड़ी राहत मिली है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने राज्य में म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर्स (MSSCs) स्थापित करने के लिए 47.37 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर किया है। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी राज्य सरकार की पहल और सतत प्रयासों का परिणाम है।
🔹 शहरी निकायों की चुनौतियों का समाधान
मंत्री ने कहा कि ये केंद्र शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की प्रमुख समस्याओं जैसे कर्मचारी की कमी, सीमित वित्तीय संसाधन और तकनीकी सहायता की कमी को दूर करने में मदद करेंगे। राज्य सरकार का लक्ष्य शहरी शासन को मजबूत बनाना, डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना और नागरिकों को सुव्यवस्थित नगर प्रशासन प्रदान करना है। इसके तहत 15 MSSCs स्थापित किए जाएंगे जो 74 शहरी निकायों (ULBs) को सेवाएं देंगे। यह कदम 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है।
🔹 एक ही स्थान पर सभी नगर सेवाएं
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ये MSSCs वन-स्टॉप फसिलिटेशन हब के रूप में काम करेंगे। इन केंद्रों पर नागरिकों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, व्यापार लाइसेंस, पालतू पशु पंजीकरण, संपत्ति कर भुगतान, कूड़ा बिल संग्रह और शिकायत निवारण जैसी नगर सेवाएं एक ही स्थान पर पारदर्शी और सरल तरीके से उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि यह केंद्र पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर कार्य करेंगे। इन MSSCs में लेखा प्रबंधन, वेतन भुगतान और विक्रेता भुगतान जैसी सेवाओं का केंद्रीकरण किया जाएगा। छोटे नगरों में यह केंद्र घर-घर कर और बिल संग्रह जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराएंगे, जिससे नागरिकों को सुविधा और पारदर्शिता दोनों मिलेगी।
ये भी पढ़ें : >> हिमुडा देगा युवाओं के स्टार्टअप को फंडिंग, 25 लाख का इनोवेशन फंड मंजूर
🔹 पहली किस्त में 23.68 करोड़ रुपये जारी
मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार इन परियोजनाओं के लिए दो किस्तों में फंड जारी करेगी। पहली किस्त 23.68 करोड़ रुपये की पहले ही जारी की जा चुकी है, जबकि शेष राशि केंद्रों के संचालन शुरू होने पर दी जाएगी। यह हिमाचल में संस्थागत और संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि स्वयं सहायता समूह (SHGs) और गैर-सरकारी संगठन (NGOs) वार्ड स्तर पर नगर सेवाओं की डिलीवरी में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इससे नागरिक भागीदारी और जागरूकता बढ़ेगी, जिससे योजना का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा। मंत्री ने कहा कि यह पहल राज्य सरकार की “स्वच्छ शहर, समृद्ध शहर” (Swachh Shehar, Samridh Shehar) की दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह योजना हिमाचल में सुदृढ़, सहभागी और सतत शहरी शासन को बढ़ावा देगी।
