पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार प्रदेश में आया हेल्पर भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचार और अराजकता का माध्यम बना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश के 6,202 प्री–प्राइमरी विद्यालयों में आया हेल्पर रखने की घोषणा तो कर दी, लेकिन भर्ती के लिए न कोई नियम तय किए गए हैं और न ही किसी पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
जयराम ठाकुर ने बताया कि चयनित श्रमिकों को प्रतिमाह लगभग 3,800 रुपये मानदेय मिलेगा, जिसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। इसके बावजूद सुक्खू सरकार ने इन नियुक्तियों को आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से भरने का निर्णय लेकर भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोल दिए हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हमने पहले ही बताया था कि मंत्री ने अपनी पूरी मित्र मंडली को आउटसोर्स की एजेंसियां खोलने के निर्देश दे दिए थे। जिसके जरिए वह भ्रष्टाचार और मनमानी कर सकें। ऐसे लोगों द्वारा आउटसोर्स की नौकरियां थोक के भाव बेचने के आरोप सरकार के करीबियों पर लगे थे। जिसे हमने हमेशा उठाया था। लोगों ने आउटसोर्स की नौकरियों के लिए भी लाख रुपए– दो लाख रुपए रेट खोल कर वसूली की थी। इसी तरीके के आरोप एनटीटी की भर्ती में भी लगे थे जो अंततः अन्य कारणों से रद्द हो गई। आउट सोर्स भर्तियों में अनियमिता को लेकर न्यायायल द्वारा सरकार की कड़ी आलोचना की जाती रही है। क्योंकि आउट सोर्स भर्तियां करने वाली एजेंसियों से जुड़े एक से बढ़कर एक हैरान करने वाले तथ्य सामने आते रहते हैं। जो सरकार की मंशा पर सवाल उठाते रहते हैं। आया हेल्पर भर्ती भी सरकार की भ्रष्टाचार योजना का नायाब नमूना है। जहां “खाता न बही जो सरकार कहे वही सही” वाली योजना चलाई जा रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि आया हेल्पर भर्ती में स्पष्ट दिशा निर्देश न रखने के पीछे सरकार की यही मंशा अपने मित्र मंडली की आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना और पंचायत चुनाव को प्रभावित करना है। आया हेल्पर भर्ती कर रही कंपनियों को सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि पंचायत चुनाव के ठीक पहले ही यह नियुक्तियां देनी हैं और देनी किसे हैं–यह सरकार तय करेंगी। इस तरीके से केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित और वित्त पोषित योजना को सुक्खू सरकार भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद की भेंट चढ़ाकर न सिर्फ नैतिकता को दरकिनार कर रही है बल्कि प्रदेश के लोगों का भी हक छीनने की कोशिश कर रही है। यह कोशिश हम कामयाब नहीं होने देंगे।
