एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश के नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चार नगर निगमों में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीन पर जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। कांग्रेस केवल पालमपुर नगर निगम में जीत हासिल कर अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल रही, जबकि मंडी, धर्मशाला और सोलन में उसे हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार के लिए चेतावनी हैं। हालांकि स्थानीय निकाय चुनावों को सीधे विधानसभा चुनावों का पैमाना नहीं माना जाता, लेकिन ये जनता के मूड और सरकार के प्रति भरोसे का संकेत जरूर देते हैं। ऐसे में 2027 के हिमाचल विधानसभा चुनाव से पहले आए ये परिणाम कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं।

कांग्रेस को सोलन और धर्मशाला में बड़ा झटका
वर्ष 2021 के नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने सोलन, धर्मशाला और पालमपुर में जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी केवल मंडी में सफल रही थी। इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीजेपी ने सोलन और धर्मशाला दोनों नगर निगम कांग्रेस से छीन लिए और मंडी में भी अपना कब्जा बरकरार रखा। विशेष रूप से सोलन और धर्मशाला में मिली हार को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये दोनों क्षेत्र शहरी मतदाताओं के रुझान को दर्शाते हैं।
चुनाव प्रचार में खुद उतरे थे मुख्यमंत्री सुक्खू
नगर निगम चुनावों को कांग्रेस ने प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चारों नगर निगम क्षेत्रों में जाकर चुनाव प्रचार किया। मंडी में उन्होंने वार्डों को 50-50 लाख रुपये की विकास राशि देने का वादा भी किया था। इसके बावजूद पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इससे विपक्ष को सरकार की लोकप्रियता पर सवाल उठाने का अवसर मिल गया है। कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए अपने कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। मंडी में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, सोलन में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, पालमपुर में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और धर्मशाला में एचपीटीडीसी के चेयरमैन आरएस बाली को चुनाव प्रभारी बनाया गया था। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने भी चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन इसके बावजूद पार्टी तीन नगर निगमों में जीत दर्ज नहीं कर सकी।

पालमपुर ने बचाई कांग्रेस की साख
चार नगर निगमों में पालमपुर कांग्रेस के लिए राहत लेकर आया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां कांग्रेस की जीत का बड़ा कारण स्थानीय विधायक आशीष बुटेल और पूर्व विधायक बीबीएल बुटेल का मजबूत जनाधार रहा। अगर पालमपुर में भी कांग्रेस हार जाती, तो चारों नगर निगमों में उसका पूरी तरह सफाया हो जाता। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निगम चुनावों को सीधे विधानसभा चुनावों का ट्रेलर नहीं माना जा सकता, लेकिन ये जनता के रुझान का महत्वपूर्ण संकेत जरूर देते हैं। बीजेपी की तीन नगर निगमों में जीत से विपक्ष का मनोबल बढ़ा है, जबकि कांग्रेस को सरकार और संगठन दोनों स्तर पर आत्ममंथन करना होगा।
