एआरबी टाइम्स ब्यूरो | मंडी
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास और जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने वीरवार देर सायं सरकाघाट उपमंडल के भांबला और बही-1 में स्थापित एचपी शिवा क्लस्टर का दौरा कर परियोजना के अंतर्गत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिंचाई टैंक, मोटर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का जायजा लिया।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बागवानी को नई दिशा देने वाली एचपी शिवा परियोजना किसानों और बागवानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च से भांबला क्लस्टर में सिंचाई व्यवस्था शुरू हो जाएगी और बागवानों को पानी उपलब्ध होने लगेगा। उन्होंने कहा कि पौधों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी बागवानों की है, जबकि सरकार की ओर से तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बागवानों से आह्वान किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
निरीक्षण के बाद भांबला में बागवानों के साथ बातचीत करते हुए मंत्री ने बताया कि यदि किसान चाहें तो तीन हेक्टेयर भूमि में भी क्लस्टर स्थापित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए पानी की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। उन्होंने कहा कि एचपी शिवा क्लस्टर के अंतर्गत बागवानी विभाग की ओर से अधिकांश कार्य निःशुल्क करवाए जाते हैं।
भांबला का एचपी शिवा क्लस्टर 12.7 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसकी स्थापना फरवरी में हुई है और इससे 67 परिवार जुड़े हुए हैं। यहां पेरा की मौसंबी प्रजाति के 1888, वैलेंसिया के 2222, ब्लड रेड के 5000 और मौसंबी के 2000 पौधों सहित कुल 11,110 पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि 2543 पौधे अभी और लगाए जाने हैं। वहीं बही-1 क्लस्टर करीब 9.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 30 किसान जुड़े हुए हैं। यहां अमरूद के 8365 पौधे लगाए गए हैं।
राजस्व विभाग में किए जा रहे सुधार
मंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग में कई सुधार लागू किए जा रहे हैं। अब कई प्रमाणपत्र घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त किए जा सकेंगे। इसके साथ ही जमाबंदी और ततीमा भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि राजस्व मामलों के निपटारे के लिए समयसीमा तय कर दी गई है। निशानदेही के लिए छह महीने का समय निर्धारित किया गया है, जिसे कारण बताए जाने पर तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है। यदि नौ महीने में भी निशानदेही नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इसी प्रकार तकसीम के मामलों के निपटारे के लिए नौ महीने की समयसीमा तय की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है। लेकिन एक वर्ष के भीतर तकसीम का निपटारा करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इंतकाल की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी, जिससे लोगों को तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वन अधिकार अधिनियम की दी जानकारी
इस अवसर पर मंत्री ने उपस्थित लोगों को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी।
इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव पवन ठाकुर, एसडीएम सरकाघाट राजेश गौतम, परियोजना निदेशक एचपी शिवा देवेंद्र ठाकुर, संयुक्त निदेशक विद्या प्रकाश बैंस, उपनिदेशक संजय गुप्ता और डीएसपी संजीव गौतम सहित अन्य अधिकारी और बागवान उपस्थित रहे।
