एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Shimla Summer Festival 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह से मशहूर पंजाबी गायक व अभिनेता जस्सी गिल और बब्बल राय के नाम रही। ऐतिहासिक रिज मैदान पर आयोजित इस सांस्कृतिक उत्सव में हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आए पर्यटकों का हुजूम उमड़ा, जिन्होंने देर रात तक बेहतरीन प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
अंतिम सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत हमेशा की तरह स्थानीय हिमाचली कलाकारों की रंगारंग और पारंपरिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने दर्शकों को देवभूमि की संस्कृति से रूबरू कराया। इसके बाद जैसे ही मुख्य आकर्षण के रूप में जस्सी गिल और बब्बल राय ने मंच संभाला, पूरा रिज मैदान तालियों और गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दोनों कलाकारों ने एक के बाद एक अपने कई सुपरहिट और लोकप्रिय गाने पेश किए। अपनी दमदार गायकी से उन्होंने वहां मौजूद दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। खचाखच भरे रिज मैदान का माहौल देर रात तक पूरी तरह उत्सव के रंग में डूबा रहा।

ऋषभ सल्होत्रा बने वॉयस ऑफ माउंटेन्स
Shimla Summer Festival 2026 के तहत आयोजित प्रदेश स्तरीय गायन प्रतियोगिता वॉयस ऑफ माउंटेन्स का ग्रैंड फिनाले भी इसी अंतिम संध्या का मुख्य आकर्षण रहा। कड़े मुकाबले के बीच ऋषभ सल्होत्रा ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। वहीं शालू धीमान दूसरे और अंजलि तीसरे स्थान पर रहीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शरीक हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पुरस्कारों का विवरण इस प्रकार रहा। प्रथम पुरस्कार के रूप में 51 हजार रुपये दिए गए। जबकि द्वितीय में 31 हजार और तृतीय पुरस्कार में 21 हजार रुपये दिए गए। फाइनल राउंड में हिमाचल के विभिन्न जिलों से चुने गए 06 शीर्ष प्रतिभागियों ने फिल्मी, सूफी और लोक गीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर अपनी सुर-ताल का लोहा मनवाया। इस मंच ने राज्य की युवा संगीत प्रतिभाओं को आगे आने का एक बेहतरीन अवसर दिया।
रैंप पर दिखा हिमाचली संस्कृति और आधुनिकता का संगम

सांस्कृतिक संध्या को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए एक विशेष फैशन शो का भी आयोजन किया गया। फैशन शो में प्रतिभागियों ने आधुनिक और समकालीन फैशन के साथ-साथ हिमाचली संस्कृति से प्रेरित पारंपरिक परिधानों को बेहद खूबसूरती से रैंप पर प्रदर्शित किया। प्रतिभागियों के आत्मविश्वास, मंच संचालन क्षमता, प्रस्तुति शैली और परिधान चयन के आधार पर निर्णायक मंडल (जूरी) ने उनका मूल्यांकन किया। पारंपरिक और आधुनिकता के इस अनूठे संगम ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
