एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने बुधवार को शिमला के बचत भवन में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। इस दौरान कई विभागों के अधूरे रिकॉर्ड और अधिकारियों की तैयारी पर आयोग ने नाराजगी जताई।
आयोग अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि कई विभागों ने योजनाओं से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी फील्ड स्तर पर नियमित कार्य करें तो रिकॉर्ड भी बेहतर रहता है। रिकॉर्ड में लापरवाही अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी है तथा कोई भी योग्य व्यक्ति योजना से वंचित नहीं रहना चाहिए।
योजनाओं के लाभ पर नहीं दे सके जवाब
बैठक के दौरान आयोग ने अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी मांगी। अधिकारियों से पूछा गया कि इन योजनाओं से अनुसूचित जाति समुदाय को कितना लाभ मिला, लेकिन विभाग के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आयोग ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक से पहले उपायुक्त कार्यालय की ओर से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद अधिकारी आवश्यक रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचे। आयोग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
92 प्रतिशत बजट खर्च
समीक्षा में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत जिले को 25.43 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ, जिसमें से 31 मार्च 2026 तक 23.49 करोड़ रुपये यानी करीब 92 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है। आयोग ने सभी लोक निर्माण विभाग के मंडलों को निर्देश दिए कि वे अपनी सबसे बड़ी परियोजनाओं का विवरण दें और यह भी बताएं कि उनसे अनुसूचित जाति वर्ग के कितने लोगों को लाभ मिला।
एससी/एसटी एक्ट मामलों की भी समीक्षा
आयोग सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एट्रोसिटी के आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत भी जांच जारी रखी जाए।
वहीं, आयोग सदस्य डॉ. विजय डोगरा ने एसडीएम स्तर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति विजिलेंस कमेटियों की नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके। आयोग ने सभी विभागों को सात दिन के भीतर समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
अंबेडकर भवनों की रिपोर्ट मांगी
आयोग ने जिले में बने अंबेडकर भवनों की स्थिति और रखरखाव की जानकारी भी मांगी। सभी एसडीएम को अपने-अपने उपमंडल में स्थित अंबेडकर भवनों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
ये रहे प्रमुख आंकड़े
- जिले में पंचायती राज एवं शहरी निकायों में अनुसूचित जाति वर्ग के 265 निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।
- एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत वर्ष 2023 में 24, 2024 में 37 और 2025 में 42 मामले दर्ज हुए।
- वर्ष 2018 से 2026 तक 52 मामले जिला न्यायालय में लंबित हैं।
- अंतर्जातीय विवाह पुरस्कार योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 29, 2024-25 में 28 तथा 2025-26 में 11 लाभार्थियों को लाभ मिला।
- स्वर्ण जयंती आश्रय योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में 285 आवास स्वीकृत किए गए।
बैठक से गैरहाजिर अधिकारियों पर सख्ती
समीक्षा बैठक में कई विभागाध्यक्ष अनुपस्थित मिले। इस पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की जगह अधीनस्थ अधिकारियों को भेजना स्वीकार्य नहीं है। लोक निर्माण विभाग की ओर से एसडीओ और सहायक अभियंता के पहुंचने पर आयोग ने तत्काल अधिशाषी अभियंता (एक्सईएन) को बुलाने के निर्देश दिए, जिसके बाद वे करीब 15 मिनट में बैठक में पहुंचे। आयोग ने उपायुक्त को निर्देश दिए कि बैठक से अनुपस्थित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर आयोग को रिपोर्ट भेजी जाए।
उपायुक्त ने दिया भरोसा
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आयोग का स्वागत करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आवंटित बजट की नियमित निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत इस वर्ष जिला शिमला से 61 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को भारत भ्रमण पर भेजा गया।
बैठक के अंत में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा ने आयोग को आश्वस्त किया कि बैठक में दिए गए सभी निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक शुरू होने से पहले आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
