एआरबी टाइम्स ब्यूरो | कुल्लू
देश की सबसे कठिन और रोमांचक धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा को लेकर कुल्लू जिला प्रशासन ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन ने इस वर्ष 10 से 23 जुलाई तक आयोजित होने वाली इस पवित्र यात्रा को आगामी आदेशों तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।
कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा ने यह निर्णय संयुक्त विशेषज्ञ निरीक्षण दल की रिपोर्ट और क्षेत्र में संभावित प्राकृतिक आपदाओं के गंभीर खतरों का गहन मूल्यांकन करने के बाद लिया है। इसके साथ ही प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर स्थापित सभी अस्थायी शिविरों, टेंटों, राशन की दुकानों और अन्य ढांचों को तीन दिनों के भीतर पूरी तरह से हटाने के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
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क्यों असुरक्षित है यात्रा मार्ग?
प्रशासन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पर्वतारोहण संस्थान मनाली, राजस्व विभाग और वन विभाग के विशेषज्ञों के एक संयुक्त दल ने श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग का विस्तृत जमीनी निरीक्षण किया था।
भीमडवारी से पार्वती बाग मार्ग अत्यंत खतरनाक: विशेषज्ञ दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भीमडवारी से पार्वती बाग तक का ट्रैक इस समय बेहद असुरक्षित है। ग्लेशियरों की स्थिति और मौसम के अनिश्चित मिजाज को देखते हुए इस मार्ग पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा है।
वैकल्पिक मार्ग भी व्यावहारिक नहीं: प्रशासन ने मुख्य मार्ग के असुरक्षित होने के बाद कुछ वैकल्पिक रास्तों की संभावनाओं को भी तलाशा था। हालांकि, 18 जून को आई दूसरी रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि प्रस्तावित और मौजूदा दोनों ही मार्गों (विशेषकर भीमडवारी और पार्वती बाग के बीच) पर किसी भी आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य (Rescue Operation) चलाना लगभग असंभव होगा।

श्रीखंड महादेव यात्रा का पौराणिक और धार्मिक महत्व
समुद्र तल से लगभग 18,570 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव को भगवान शिव के सबसे दुर्गम और पवित्र निवास स्थानों में से एक माना जाता है। अमरनाथ यात्रा से भी कठिन मानी जाने वाली इस यात्रा का सनातन धर्म में बेहद खास महत्व है।
72 फीट ऊंचा प्राकृतिक शिवलिंग: श्रीखंड चोटी पर किसी मंदिर के बजाय एक विशाल और प्राकृतिक चट्टान है, जिसे साक्षात शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। इसके दर्शन मात्र से ही भक्त खुद को धन्य मानते हैं।
भस्मासुर और भगवान शिव की कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब राक्षस भस्मासुर ने भगवान शिव से अमर होने का वरदान पाकर स्वयं उन्हीं को भस्म करने का प्रयास किया था, तब भोलेनाथ इसी श्रीखंड पर्वत की एक गुफा में आकर छिप गए थे। बाद में भगवान विष्णु ने ‘मोहिनी’ रूप धारण कर भस्मासुर का अंत किया था।
पांडवों से जुड़ा इतिहास: माना जाता है कि अपने अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडवों ने भी इस दुर्गम पर्वत की यात्रा की थी। यात्रा मार्ग पर मिलने वाले ‘भीम बही’ और ‘भीमडवारी’ जैसे स्थान आज भी पांडवों और विशेषकर महाबली भीम के इस क्षेत्र में आगमन के प्रतीक माने जाते हैं।
श्रद्धालुओं से प्रशासन की अपील
उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा ने देश-विदेश से आने वाले सभी शिव भक्तों से अपील की है कि वे प्रशासनिक आदेशों का सम्मान करें और इस समय श्रीखंड महादेव की ओर रुख न करें। बिना अनुमति और बिना पंजीकरण के यात्रा मार्ग पर जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इस समय ट्रैक पर जाना जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
