एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला की कार्यकारिणी परिषद (ईसी) की बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। कुलपति प्रो. महावीर सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ग्रीन एनर्जी एवं नैनो टेक्नोलॉजी सहित चार नए रोजगारोन्मुखी कोर्स शुरू करने को हरी झंडी दे दी गई है। इन नए पाठ्यक्रमों में पीएचडी, एमटेक, स्नातकोत्तर (पीजी) डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन कोर्सेज की शुरुआत से ऊर्जा, पर्यावरण और नैनो विज्ञान जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उच्च स्तरीय अनुसंधान (रिसर्च) को बढ़ावा मिलेगा।
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की देखरेख में होगा पीएचडी शोध
विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब एचपीयू के पीएचडी शोध को सीधे राष्ट्रीय रक्षा अनुसंधान संस्थानों से जोड़ा जाएगा। इसके तहत कार्यकारिणी परिषद ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिष्ठित संस्थान ‘इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज’ के वैज्ञानिकों को बतौर शोध पर्यवेक्षक मंजूरी दे दी है। इससे पीएचडी शोधार्थियों को देश के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का सीधा मार्गदर्शन मिल सकेगा।
इसके अलावा, शोध कार्यों की सुविधा को आधुनिक बनाने के लिए नोएडा स्थित ‘लर्निंग रिसोर्स सेंटर’ के जीर्णोद्धार हेतु 8.3 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी गई है। साथ ही पीएचडी शोध प्रबंधों (Thesis) के मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हुए अब विषय विशेषज्ञों के पैनल को 10 के स्थान पर संशोधित करके 6 कर दिया गया है।
बीएड के छात्रों को विशेष अवसर
कार्यकारिणी परिषद ने सत्र 2015-16 और उसके बाद के उन बीएड (B.Ed) विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है, जिनकी डिग्री किसी कारणवश अधूरी रह गई थी। विश्वविद्यालय ऐसे सभी छात्रों को अपनी डिग्री पूरी करने के लिए एक विशेष ‘मर्सी चांस’ (विशेष अवसर) प्रदान करेगा। बैठक में इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल स्टडीज का नाम बदलकर अब इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट करने को भी मंजूरी दी गई है, ताकि वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान स्पष्ट हो सके।
75 गैर-शिक्षक पदों पर होगी भर्ती, सुधरेगा प्रशासनिक काम
लंबे समय से कर्मचारियों की कमी झेल रहे विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए भी राहत भरी खबर है। ईसी ने विश्वविद्यालय में 75 रिक्त गैर-शिक्षक पदों को भरने की मंजूरी दे दी है। इस भर्ती से परीक्षा शाखा, स्थापना, वित्त, पुस्तकालय और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के रोजमर्रा के कामकाज में तेजी और सुधार आएगा। विश्वविद्यालय में वर्तमान में करीब 500 गैर-शिक्षक पद खाली चल रहे हैं।
