एआरबी टाइम्स ब्यूरो, कांगड़ा | हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश की पंचायतों में घरेलू और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से ‘यूजर चार्ज’ यानी कचरा संग्रहण शुल्क वसूला जाएगा। बीडीओ (BDO) देहरा ने मॉडल उप नियम-2026 के तहत सभी पंचायत सचिवों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही के लिए पंचायत सचिव सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।
खुलेगा अलग बैंक खाता, स्वच्छता पर ही खर्च होगा पैसा
निर्देशों के अनुसार, जिन पंचायतों में अभी तक शुल्क का निर्धारण नहीं हुआ है, वहां ग्रामसभा या पंचायत की विशेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर इसे तत्काल तय किया जाएगा। इसके बाद सभी परिवारों और दुकानों का सर्वे कर एक सूची बनाई जाएगी। प्रत्येक पंचायत को इस कचरा शुल्क के लिए एक अलग बैंक खाता खोलना होगा, जिसमें इकट्ठा की गई राशि को अगले ही कार्य दिवस (Working Day) पर जमा कराना अनिवार्य होगा। इस राशि का इस्तेमाल केवल स्वच्छता कार्यों, सफाई मित्रों के मानदेय (Salary) और कचरा प्रबंधन पर ही किया जा सकेगा। पंचायत सचिव संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जसरोटिया ने भी इन निर्देशों की पुष्टि की है।
विभिन्न श्रेणियों के लिए तय मासिक शुल्क दरें:
| श्रेणी | मासिक शुल्क |
| सामान्य ग्रामीण परिवार | ₹50 |
| सामान्य दुकानें, ढाबे, चाय-मिठाई की दुकानें, छोटे दफ्तर | ₹100 |
| फल-सब्जी थोक व्यापारी, बेकरी इकाइयां, वाहन मरम्मत वर्कशॉप | ₹500 |
| बैंक, रेस्टोरेंट, मैरिज पैलेस, सिनेमा हॉल और बड़े अस्पताल | ₹1,000 से ₹3,000 |
