एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी (क्लास फोर) कर्मचारियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 28 मई 2024 के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है, जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष तय करने का आदेश दिया गया था। सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी, जहां उसे करारा झटका लगा है।
2018 की विवादित अधिसूचना रद्द, समानता का सिद्धांत बहाल
यह पूरा विवाद राज्य सरकार द्वारा 21 फरवरी 2018 को जारी एक अधिसूचना से शुरू हुआ था। इस अधिसूचना के तहत, 10 मई 2001 के बाद नियुक्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से घटाकर 58 वर्ष कर दी गई थी। इसके खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में 112 याचिकाएं दायर की थीं। हाईकोर्ट ने इसे ‘समानता के सिद्धांत’ के विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया था और कहा था कि एक ही कैडर के कर्मचारियों के बीच सेवानिवृत्ति आयु को लेकर ऐसा भेदभाव नहीं किया जा सकता।
बहाल होंगी सेवाएं, मिलेगा पिछले 2 साल का पूरा एरियर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के निम्नलिखित आदेशों का पालन करना होगा:
कर्मचारियों की बहाली: जिन कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु में जबरन रिटायर कर दिया गया था, उन्हें तुरंत सेवा में बहाल कर 60 वर्ष की आयु तक काम करने का मौका दिया जाए।
वित्तीय लाभ: जो कर्मचारी इस कानूनी लड़ाई के दौरान ही 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, उन्हें 58 से 60 वर्ष की अवधि का पूरा वेतन और वित्तीय लाभ (Back Wages) दिया जाए।
