एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
जिले के स्कूलों में विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने, अनुशासन की भावना विकसित करने और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में सेवानिवृत्त सैनिकों और पूर्व सैन्य अधिकारियों की सेवाएं ली जाएंगी। यह निर्णय शनिवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला एंकॉर्ड समिति की बैठक में लिया गया। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई।
बैठक में जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों, संवेदनशील पंचायतों को रेड जोन से येलो जोन में लाने और विभिन्न विभागों के प्रयासों की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ अभियान केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड स्तर पर प्रभावी तरीके से संचालित किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जागरूकता कार्यक्रमों में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने कहा कि जिले की 19 संवेदनशील पंचायतों को रेड जोन से येलो जोन में लाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागों को आपसी समन्वय से ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
विद्यार्थियों को अपने अनुभवों से प्रेरित करेंगे पूर्व सैनिक
उपायुक्त ने बताया कि जिला स्तर पर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और सैनिकों की सूची तैयार कर ली गई है। सूची में शामिल सभी लोगों ने स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सहमति दी है। यह सूची सभी स्कूलों को उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रधानाचार्य सूची में शामिल पूर्व सैनिकों को विद्यालय में आमंत्रित कर विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे।
इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों, अनुशासन, लक्ष्य निर्धारण, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और सकारात्मक सोच के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
8 करोड़ की संपत्ति जब्त, 556 मामले दर्ज
उपायुक्त ने नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए बताया कि कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इस वर्ष जिले में NDPS एक्ट के तहत 556 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई के साथ नशा निवारण, पुनर्वास और जागरूकता गतिविधियों को भी मजबूत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए पुलिस के साथ प्रशासन, शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, अभिभावकों और आम जनता की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। युवाओं को खेल, शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाए।
