एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने मालरोड स्थित ‘रेड टेप’ (Red Tape) स्टोर पर कैरी बैग के नाम पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे वसूलने के मामले में सख्त रुख अपनाया है और 24 हजार जुर्माना लगाया है। आयोग ने तीन अलग-अलग शिकायतों पर फैसला सुनाते हुए स्टोर को अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) का दोषी माना है। आयोग ने रेड टेप आउटलेट को निर्देश दिया है कि वह तीनों ग्राहकों से कैरी बैग के लिए वसूले गए 10-10 रुपये रिफंड करे और साथ ही मानसिक प्रताड़ना व मुकदमा खर्च के रूप में कुल 24,000 रुपये (प्रति शिकायतकर्ता 8,000 रुपये) का भुगतान करे।
क्या था पूरा मामला?
मंडी निवासी सुभाष चंद्र, शिमला निवासी अनिल ठाकुर और गौरव कुमार ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। अगस्त 2025 में सुभाष चंद्र और अनिल ठाकुर ने स्टोर से छूट दर पर ट्रंक्स खरीदे, जबकि अप्रैल 2025 में गौरव कुमार ने जींस और शर्ट खरीदी। बिलिंग काउंटर पर जब सामान दिया गया तो बिल में बिना पूर्व अनुमति के कैरी बैग के 10 रुपये अतिरिक्त जोड़ दिए गए। जब ग्राहकों ने इसका विरोध किया और पैसे वापस मांगे, तो कर्मचारियों ने बिल में एंट्री का हवाला देकर पैसे लौटाने से मना कर दिया।
आयोग ने खारिज किया स्टोर का तर्क
सुनवाई के दौरान स्टोर की ओर से तर्क दिया गया कि पेड़ों की कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण (Go Green) को बढ़ावा देने के लिए कैरी बैग का शुल्क लिया जाता है और इसे खरीदना ग्राहकों के लिए अनिवार्य नहीं है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कैरी बैग पर कंपनी का नाम, लोगो या विज्ञापन छपा है, तो उसका शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जा सकता। ऐसा बैग मुफ्त देना अनिवार्य है। ‘सेल ऑफ गुड्स एक्ट’ का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि बेचे गए सामान को ग्राहक को सुरक्षित और उचित स्थिति (Deliverable State) में सौंपना पूरी तरह विक्रेता की जिम्मेदारी है। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्टोर को 45 दिनों के भीतर हर्जाने की राशि का भुगतान करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
