एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद (Ram Mandir Donation Controversy) की गूंज अब हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भी सुनाई देने लगी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों, कांग्रेस विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ राज्य सचिवालय से शिमला के ऐतिहासिक राम मंदिर तक पैदल मार्च किया। मंदिर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम की विधिवत पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और हवन में भाग लिया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
आस्था से जुड़ा है राम मंदिर चढ़ावा विवाद : सीएम सुक्खू
पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यदि राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल धन का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और जो स्वयं को रामभक्त कहते हैं, उन्हें धार्मिक आस्था का सम्मान करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा भगवान श्रीराम के प्रति सम्मान का भाव रखती आई है। उन्होंने याद दिलाया कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। सुक्खू ने यह भी कहा कि राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कांग्रेस के इस पैदल मार्च और मुख्यमंत्री के बयान के बाद हिमाचल की राजनीति में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
विक्रमादित्य ने पोस्ट में लिखा- ‘हे रघुनंदन, हम शर्मिंदा हैं
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा –हे रघुनंदन, हम शर्मिंदा हैं, आपके नाम पर सत्ता भोगने वाले आज भी जिंदा हैं। जिन्होंने भगवे की आड़ में आपके ही धाम को लूट लिया, वो ‘रामभक्त’ बनने वाले ढोंगी आज भी सलाखों के बाहर परिंदा हैं। हालांकि विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में किसी राजनीतिक दल या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर भाजपा पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
