एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर | तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बाद केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए घोषित 1500 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता अभी तक प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई है। सितंबर 2025 में घोषित इस सहायता राशि को लेकर प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रख रही है। धर्माणी सोमवार को लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह घुमारवीं में अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत ग्राम पंचायत पट्टा, सेऊ और बाड़ी मझेड़वां के पात्र लाभार्थियों के साथ जन संवाद कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों के लिए घोषित सहायता राशि राजनीति का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के अधिकार और प्रभावित परिवारों के दर्द से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल के वित्तीय संसाधनों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से आपदा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाई है।
पात्र परिवारों को 1500 रुपये मासिक सहायता
मंत्री ने कहा कि अपना परिवार सुखी परिवार योजना का उद्देश्य अति निर्धन परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है, जो किसी कारणवश अब तक इनका लाभ नहीं ले पाए हैं। उन्होंने कहा कि 2 अक्तूबर से योजना के पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता के साथ 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। हिमकेयर योजना को बीमा आधारित बनाकर प्रत्येक परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी प्रदेश सरकार काम कर रही है। धर्माणी ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि अपने क्षेत्रों में योजना के पात्र किसी भी परिवार को लाभ से वंचित न रहने दें। उन्होंने अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को 20 सितंबर से पहले सभी पात्र परिवारों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का जोर
धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ के तहत प्रदेश के करीब 6000 अनाथ बच्चों की शिक्षा, आवास और अन्य आवश्यकताओं का खर्च सरकार वहन कर रही है। इन बच्चों को 27 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 4000 रुपये की सहायता भी दी जा रही है। विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ और उच्च शिक्षा के लिए डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना संचालित की जा रही है। विद्यार्थी ऋण योजना के तहत 20 लाख तक का शिक्षा ऋण एक प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी घुमारवीं अभिषेक शर्मा, पट्टा पंचायत के उपप्रधान रवि ठाकुर, बीडीसी सदस्य कुलदीप सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
