एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश में करवा चौथ के अवसर पर 29 अक्तूबर 2026 को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस छुट्टी का लाभ महिलाओं के साथ पुरुषों को भी मिलेगा। अवकाश के चलते प्रदेश के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी रहेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने करवा चौथ के अवसर पर अवकाश की घोषणा की है। इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों को त्योहार मनाने के लिए समय मिलेगा।
प्रेम और विश्वास का प्रतीक है करवा चौथ
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। त्योहार को लेकर महिलाओं में खास उत्साह रहता है। बाजारों में खरीदारी, मेहंदी, चूड़ियों और पारंपरिक परिधानों की रौनक देखने को मिलती है। सार्वजनिक अवकाश के चलते लोगों को परिवार के साथ त्योहार मनाने का अवसर मिलेगा।
करवा चौथ 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, दिल्ली के समय के मुताबिक 29 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए करीब 1 घंटा 18 मिनट का समय मिलेगा।
- व्रत की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, वीरवार
- चतुर्थी तिथि शुरू: 29 अक्टूबर, रात 1:06 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, रात 10:09 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक
पूजा मुहूर्त और चांद निकलने का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए हिमाचल प्रदेश में व्रत रखने वाली महिलाएं अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय जरूर जांच लें।
करवा चौथ की पूजा विधि
करवा चौथ के दिन पूजा की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है। पारंपरिक रूप से महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पूजा की जाती है।
पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:
- शाम को पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की तैयारी करें।
- पूजा में दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई, जल और करवा सहित आवश्यक पूजन सामग्री रखें।
- शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करें और करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और पति के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
- चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें और पारंपरिक रीति के अनुसार दर्शन करने के बाद व्रत खोलें।
पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की मान्यताओं और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।
