एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण युवाओं में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय बनती जा रही है। यह बात उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा, जिला सामुदायिक संसाधन समूह और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सिरिंज के माध्यम से नशा करने वाले युवाओं में एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में समय-समय पर एचआईवी जांच करवाना और नशे से दूर रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि वे नशे की गिरफ्त में न आएं।
प्रभावितों को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर
उपायुक्त ने कहा कि जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति के तहत जिला सामुदायिक संसाधन समूह विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से एचआईवी प्रभावित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्हें केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार और पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एचआईवी छुआछूत की बीमारी नहीं है। संक्रमित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव नहीं, बल्कि सहानुभूति और सहयोग का व्यवहार अपनाना चाहिए। इससे वे सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।
जिले में 441 एचआईवी संक्रमितों की पहचान
जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तहसीन ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के अनुसार शिमला जिले में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों का अनुमानित लक्ष्य 546 है। इनमें से अब तक 441 लोगों की पहचान की जा चुकी है, जबकि 105 लोगों की पहचान अभी शेष है।
उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में एचआईवी के 119 नए मामले सामने आए थे। इनमें 88 पुरुष, 30 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर शामिल था। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 17 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 12 पुरुष, तीन महिलाएं और दो ट्रांसजेंडर शामिल हैं। जिले में अब तक 729 एचआईवी जांच की जा चुकी हैं। इनमें केवल चार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की जांच हुई है।
95-95-95 लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रयास
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 95-95-95 लक्ष्य पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत 95 प्रतिशत एचआईवी संक्रमितों को अपनी स्थिति की जानकारी हो, उनमें से 95 प्रतिशत नियमित एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) प्राप्त करें तथा उपचार ले रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरस का स्तर नियंत्रित (Viral Suppression) रहे। इस लक्ष्य की प्राप्ति से एचआईवी संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
जिले में सात एचआईवी जांच एवं परामर्श केंद्र
जिले में सात इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (ICTC) संचालित हैं। ये केंद्र आईजीएमसी शिमला, कमला नेहरू अस्पताल, ठियोग, रोहड़ू, रामपुर और सुन्नी अस्पताल में स्थापित हैं, जहां एचआईवी की पुष्टि संबंधी जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है।
आईजीएमसी का ओएसटी केंद्र दे रहा नई जिंदगी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने बताया कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में संचालित ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) केंद्र चिट्टा, हेरोइन और स्मैक जैसे नशीले पदार्थों के आदी लोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और हिमाचल प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यहां मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श, मनोसामाजिक सहायता और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाओं के माध्यम से उपचार दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि ओएसटी केंद्र इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने की प्रवृत्ति को कम कर एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की रोकथाम में भी अहम भूमिका निभा रहा है। यहां मरीजों को नियमित स्वास्थ्य जांच, परामर्श, दवा वितरण और फॉलो-अप की सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
बैठक में रहे मौजूद
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, स्पार्क एनजीओ की प्रोजेक्ट मैनेजर दीपिका विमल, मेडिकल ऑफिसर डॉ. भारती, आशी संस्था के प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
