एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल पथ परिवहन निगम इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि नियमित कर्मचारी भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और सेवानिवृत्त पेंशनधारकों को भी दो माह से पेंशन नहीं मिल पाई है। HRTC के नियमित कर्मचारियों को हर माह की पहली तारीख को वेतन मिलना चाहिए, लेकिन अब वेतन 10 से 15 तारीख तक भी नहीं मिल रहा। इससे घरेलू खर्च, लोन, बच्चों की फीस और इलाज जैसे ज़रूरी खर्चों पर असर पड़ रहा है।
बीएमएस महासंघ के उपाध्यक्ष सुभाष वर्मा, हिमाचल परिवहन मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्यार सिंह ठाकुर, कार्यकारी अध्यक्ष मेहर चंद कश्यप, राजन वर्मा, प्रदेश महामंत्री हरीश कुमार पाराशर, कोषाध्यक्ष कपिल शर्मा, उपाध्यक्ष मनोज शर्मा,अनिल कुमार, रीना देवी, मनुज ठाकुर, प्रेस सचिव शुभम चौधरी, एवं अन्य पदाधिकारियों चमनलाल वर्मा, मनजीत बन्याल, प्रियंका ठाकुर, सजीव कुमार आदि ने संयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए कहा कि यह कैसा न्याय है? जब राज्य के अन्य कर्मचारियों को उनके अधिकार समय पर मिल रहे हैं, तो HRTC के कर्मचारियों के साथ यह भेदभाव क्यों? यह कैसी दिवाली होगी, जब हमारे घरों में अंधेरा है?”
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से पेंशन नहीं मिली, जिससे जीवन-यापन और इलाज जैसी ज़रूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं। यूनियन ने चेताया है कि यह अन्याय अब और नहीं सहा जाएगा। 2016 के वेतनमान के तहत अन्य विभागों को ₹50,000 की एरियर किस्त मिल चुकी है, लेकिन HRTC के कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिला, जिससे भेदभाव की भावना और गहराई है। ड्राइवर-कंडक्टर वर्ग के 5 वर्षों के नाइट ओवरटाइम और अतिरिक्त भत्तों का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक स्थिति बिगड़ रही है।
HRTC की कार्यशालाएं बुरी हालत में हैं और कलपुर्जों की कमी के चलते कई बसें खड़ी हैं। इससे सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और यात्रियों को असुविधा हो रही है।
भारतीय परिवहन मजदूर महासंघ और हिमाचल परिवहन मजदूर संघ ने चेताया है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यूनियन आंदोलन शुरू करेगी, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी सरकार और निगम प्रबंधन की होगी।