एआरबी टाइम्स ब्यूरो, किन्नौर
भारत-चीन सीमा (LAC) से सटे हंगरंग घाटी के ग्रामीणों ने क्षेत्र की सामरिक एवं जनहित से जुड़ी समस्याओं को लेकर रक्षा मंत्री और जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने लियो बाईपास रोड के लिए डीपीआर तैयार होने के बाद बजट स्वीकृत करने और पूह गैस एजेंसी से 45 से 50 दिन के बजाय हर माह नियमित रूप से गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाने की मांग की है।
लियो बाईपास रोड के लिए जल्द बजट स्वीकृति की मांग
हंगरंग घाटी की ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने रक्षा मंत्री, भारत सरकार को उपायुक्त किन्नौर के माध्यम से ज्ञापन भेजकर लियो बाईपास रोड के लिए शीघ्र बजट स्वीकृत करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा लियो बाईपास रोड की डीपीआर तैयार कर उच्च अधिकारियों को अग्रेषित की जा चुकी है, जिसके लिए उन्होंने BRO का आभार जताया है।
ग्रामीणों ने कहा कि अभी तक सड़क के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ है। यह मार्ग सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और LAC के समीप भारतीय सेना की आवाजाही के लिए वैकल्पिक एवं सुरक्षित मार्ग उपलब्ध करा सकता है। वर्तमान मार्ग मालिंग नाला भूस्खलन क्षेत्र से होकर गुजरता है और अक्सर बाधित हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार हंगरंग घाटी सीमावर्ती एवं वाइब्रेंट विलेज क्षेत्र है। सर्दियों में सड़क बंद होने के कारण घाटी के हजारों परिवारों, विद्यार्थियों और मरीजों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ती है। आपदा के दौरान भी इस वैकल्पिक मार्ग की उपयोगिता बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि 26 जून 2025 को सतलुज नदी में आई बाढ़ के दौरान NH-05 कई महीनों तक प्रभावित रहा था। ऐसे समय में लियो बाईपास की आवश्यकता महसूस हुई थी।
ग्रामीणों ने रक्षा मंत्री से राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और जनहित को ध्यान में रखते हुए डीपीआर के आधार पर जल्द बजट स्वीकृत कर निर्माण कार्य शुरू करवाने का आग्रह किया है।
45-50 दिन में गैस मिलने से ग्रामीण परेशान
हंगरंग घाटी की ग्राम पंचायतों सुमरा, शलखर, चांगो, नाको, लियो, चुलिंग और हांगो के ग्रामीणों ने उपायुक्त किन्नौर को एक अन्य ज्ञापन सौंपकर पूह गैस एजेंसी से नियमित गैस वितरण की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में HPSCSC पूह इंडेन गैस एजेंसी द्वारा घाटी के गांवों में करीब 45 से 50 दिन में एक बार गैस सिलेंडर वितरित किया जा रहा है। जबकि एक सिलेंडर सामान्य तौर पर 25 से 30 दिनों में समाप्त हो जाता है। इसके बाद ग्रामीणों को करीब 15 से 20 दिनों तक लकड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने कहा कि हंगरंग घाटी पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला दुर्गम जनजातीय एवं वाइब्रेंट विलेज क्षेत्र है। पूह गैस एजेंसी की दूरी भी गांवों से करीब 70 से 80 किलोमीटर है। क्षेत्र में बर्फबारी और सड़क बंद होने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में गैस की आपूर्ति में देरी से लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक गैस की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की देखभाल और परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हंगरंग घाटी में कम से कम हर माह नियमित गैस वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से दोनों मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई कर समस्या का समाधान करवाने की मांग की है।
इस मौके पर संजय नंबरदार सहित प्रधान शलखर पनमा, प्रधान सुमरा मति ताशी डोल्मा, प्रधान लियो विद्या देवी, प्रधान चुलिंग केसंग और प्रधान हांगों सुमन देवी व राम लाल उपप्रधान चांगों भी उपस्थित रहे।
