एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
जी.बी.पी.एम. राजकीय महाविद्यालय रामपुर में मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन विषयों में प्रवेश बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) रामपुर इकाई ने कड़ा विरोध जताया है।
एसएफआई रामपुर इकाई के अध्यक्ष मीना राम एवं सह सचिव विक्रांत ठाकुर ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की नाकामी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि शिक्षकों की भर्ती न कर पाना सरकार की विफलता है, लेकिन इसकी सजा छात्रों को दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत चार वर्षीय पाठ्यक्रम, रिसर्च डिग्री और बहुविषयक शिक्षा के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और विषयों में प्रवेश तक बंद किया जा रहा है। इससे नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होते हैं।
एसएफआई नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों को उनकी पसंद के विषयों से वंचित करना शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र अन्य महाविद्यालयों में प्रवेश लेने में सक्षम नहीं हैं, जिससे उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एसएफआई ने मांग की है कि मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन विषयों में तत्काल प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाए तथा आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति के साथ प्रदेशभर के महाविद्यालयों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और कॉलेज प्रशासन ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो छात्रों को संगठित कर व्यापक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
